निगम ने हाथी पार्क तोड़ दिया और अब बना नहीं रहे, किया छलावा
मोहम्मद इलियास/उदयपुर. नेहरू बाल उद्यान में मास्टर प्लान के विपरीत बनी 14 करोड़ की पार्किंग के ऊपर हाथी वाला पार्क बनाने के लिए निगम कोर्ट को गुमराह कर रहा है। इस बार निगम के अधिवक्ता ने एक्शन प्लान के लिए दो सप्ताह का और समय मांगा है, जबकि हकीकत सभी जानते हैं कि घटिया निर्माण सामग्री से बनी पार्किंग छत पर पार्क बनते ही पूरी तरह बैठ जाएगी।
इस पार्किंग पर पार्क बनाने को लेकर सिविल इंजीनियर विकास भेरविया ने राजस्थान पत्रिका के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी बनाम राज्य सरकार में पारित निर्णय के आधार पर जनहित याचिका पेश कर रखी है। याचिका में नगर निगम द्वारा प्रस्तुत तथ्यों, मास्टर प्लान एवं राजस्थान पत्रिका के गुलाब कोठारी बनाम राज्य सरकार में पारित निर्णय के विपरीत कार्य करना बताया है। उल्लेखनीय है कि हाथीवाला पार्क में पार्किंग इस शर्त पर बनाई गई थी कि वहां भूमिगत पार्किंग के बाद ऊपर खूबसूरत पार्क बनाया जाएगा, लेकिन उसे नजर अंदाज कर दिया गया। भूमिगत पार्किंग की छत पर अभी वाहन पार्क हो रहे हैं, जिसे निगम ने ठेका दिया हुआ है। कभी ऑक्सीजन देने वाला हाथीवाला पार्क अभी कार्बन डाई ऑक्साइड दे रहा है।
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घटिया निर्माण सामग्री के चलते पार्किंग जगह-जगह से दरकी
शहर में पार्किंग के स्थान की कमी के चलते 2013 में इस महत्वाकांक्षी योजना का काम शुरू हुआ। इसकी जिम्मेदारी रिडकोर कंपनी को दी गई, उसने यह ठेका अहमदाबाद की कंपनी को दिया, जिसने 14 करोड़ की लागत से 4 साल पहले पार्किंग बनाई। घटिया निर्माण सामग्री के चलते यह जगह-जगह दरक गई तो छत में लीकेज आ गए। सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण खराब हो गए। अभी भी वहां पानी के पड़वे फूट रहे हैं और दिन रात मोटर चलाकर पानी को खाली किया जा रहा है। निगम अधिकारियों को इसकी हकीकत पता है, लेकिन वे जानबूझ कर हाइकोर्ट में विशेषज्ञों से राय लेने का बहाना करते हुए आगे की तारीख ले रहे हैं।
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निगम ने स्वीकारा, पार्क बनाते ही अतिरिक्त भार पड़ेगा
हाइकोर्ट में निगम की ओर से पूर्व में जवाब दिया गया कि पार्किंग के ऊपर के पार्क को विकसित करने की संभावनाओं की जानकारी ली जा रही है। इसके लिए निर्मित पार्किंग के स्ट्रक्चर डिजाइन का विस्तृत अध्ययन कराया जा रहा है। यदि पार्क विकसित किया जाता है तो उससे इसकी छत पर अतिरिक्त भार आएगा। उसे सहन करने की क्षमता है या नहीं, पार्क की डिजाइन उसके लिए स्ट्रक्टचर डिजाइन का विस्तृत अध्ययन करवाया जा रहा है। इसके अतिरिक्त पार्क की क्या डिजाइन होगी, उसमें किस प्रकार के घास व पेड़- पौधे विकसित किए जाएंगे। इन सभी सम्भावनाओं का अध्ययन करने के बाद ही पार्क निर्माण का निर्णय लिया जा सकेगा। इसके लिए समय की आवश्यकता है।