
उदयपुर. लेकसिटी आने वाले पर्यटकों को अब पुलिस सहायता के लिए थाने के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। उदयपुर पुलिस मंगलवार से वॉटसऐप आधारित एआइचैटबोट पर्यटक हेल्पलाइन शुरू करने जा रही है, जिसका नम्बर 7300059984 है। माना जा रहा है कि उदयपुर जैसा एआइ आधारित, पर्यटकों पर केंद्रित, जीआइएस मैप व रियल-टाइम डैशबोर्ड से जुड़ावॉट्सऐपचैटबोट प्रदेश के किसी शहर में कहीं नहीं है।
यह पहल स्मार्ट पुलिसिंग और डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में बड़ा कदम है। चैटबोट से पर्यटक टेक्स्ट, फोटो, ऑडियो और लाइव लोकेशन भेजकर तत्काल सहायता मांग सकेंगे। सिस्टम पूरी तरह एआइ आधारित रियल-टाइम डैशबोर्ड से जुड़ा रहेगा, जिस पर जीआइएस मैप के जरिये घटना की सटीक लोकेशन दिखेगी। डुप्लीकेट सूचनाओं की स्वतः पहचान होगी और संबंधित थाने व अधिकारियों को सूचना तुरंत भेजी जाएगी। कंट्रोल रूम सूचना की प्राथमिकता तय करेगा, आवश्यकता पड़ने पर पर्यटक से सीधे संपर्क करेगा और मामला दर्ज होने से लेकर निस्तारण तक की स्थिति डैशबोर्ड पर अपडेट होती रहेगी।
इस तरह तीन भागों में बांटी व्यवस्था
- आपातकालीन सेवाएं (एसओएस, तत्काल सहायता और महिला सुरक्षा)
- घटना रिपोर्टिंग (चेन स्नैचिंग, आगजनी, डूबना, दुर्घटना, संदिग्ध गतिविधि)
- सूचनात्मक सेवाएं (निकटतम थाना, अस्पताल व पर्यटन स्थल की जानकारी)।
ऐसे काम करेगा चैटबोट
- पर्यटक वॉट्सऐपनम्बर पर संपर्क कर टेक्स्ट, फोटो या लाइव लोकेशन भेजेंगे।
- सूचना अपने आप डैशबोर्ड पर दिखेगी, जीआइएस मैप पर स्थान अंकित होगा।
- कंट्रोल रूम की ओर से त्वरित सत्यापन किया जाकर प्राथमिकता तय करेगा।
- शिकायत से संबंधित क्षेत्रीय थाने के साथ ही अधिकारी को सूचना भेजी जाएगी।
- पूरी प्रक्रिया कुछ ही मिनटों में पूर्ण होगी, जिससे प्रतिक्रिया समय घट जाएगा।
जिम्मेदार होंगे पुलिस अधिकारी
थाना प्रभारियों की जिम्मेदारी तय की गई है कि सूचना मिलते ही पुलिस दल रवाना हो जाए, निर्धारित समय में मौके पर पहुंचे और कार्रवाई पूरी करके घटना को डैशबोर्ड पर 'क्लोज्ड' दर्ज करें। वहीं, वरिष्ठ अधिकारी रियल-टाइम मॉनिटरिंग करते हुए प्रतिक्रिया समय की समीक्षा करेंगे और गंभीर मामलों में तत्काल दिशा-निर्देश देंगे। सभी एएसपी, डीएसपी, सीआइ, साइबर थाना, मानव तस्करी विरोधी यूनिट व नियंत्रण कक्ष प्रभारी को जिम्मेदारी दी गई है।
एफआइआर का विकल्प नहीं होगी सूचना
उदयपुर में यह व्यवस्था लागू करने के साथ ही स्पष्ट किया गया कि चैटबोट के माध्यम से मिली सूचना कानूनी रूप से एफआइआर नहीं मानी जाएगी, बल्कि यह केवल त्वरित सहायता का माध्यम है। पर्यटकों की निजी जानकारी गोपनीय रखी जाएगी, वहीं उनसे कोई अतिरिक्त निजी डाटा नहीं मांगा जाएगा। संज्ञेय अपराध में नियमानुसार कार्रवाई होगी। जानबूझकर गलत सूचना देने पर संबंधित के विरुद्ध विधिक कार्रवाई हो सकती है।