
उदयपुर/ कानोड़. udaipur Political news भींडर नगर पालिका के चुनाव को लेकर बिगुल बज चुका है। राजनीतिक अखाड़े का केंद्र रही भींडर नगर पालिका को लेकर कांग्रेस, भाजपा और जनता सेना जैसे दलों की निगाहें टिक गई हैं। भींडर की राजनीति का ऊंट किस ओर करवट लेगा। फिलहाल यह कहना थोड़ा मुश्किल होगा, लेकिन विषम परिस्थतियों के बीच यहां चौथा मोर्चा सामने आने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। यहां कांग्रेस का एक ओर बगावती खेमा ऐसे कदम उठा सकता है। पंचायती राज चुनाव के बीच भींडर नगर पालिका को लेकर उत्साहित राजनीतिक संगठनों के बीच तालमेल की कमी तो स्पष्ट दिख रही है, लेकिन बिखरी हुई भाजपा को समेटने के लिए नए समीकरण बनाए जा रहे हैं। भाजपा के वल्लभनगर प्रभारी उदयलाल डांगी एक बार फिर क्षेत्र में पार्टी की पकड़ को मजबूत बनाने की तान छेड़ दी है। दूसरी ओर प्रधान के सामान्य पद को लेकर यहां की राजनीति कई समीकरणों की बिगाड़ती दिख रही है। राजनीतिक दलों में दावेदारों की लंबी सूची से लोगों में विद्रोह जन्म ले रहा है। ऐसे में पार्टियों का भविष्य यहां पर दांव पर लगता दिख रहा है। वह भी तब जब भाजपा और कांग्रेस के अलावा तीसरे मोर्चे के तौर पर जनता सेना निरंतर जड़ों को गहरा करती जा रही है।
पूरा दिन चुनाव
भाजपा के वल्लभनगर प्रभारी डांगी उनका पूरा समय पंचायत राज चुनाव में दे रहे हैं। भाजपा के मण्डल अध्यक्ष सहित पदाधिकारी गांवों में बैठकें कर रहे हैं । कांग्रेस विधानसभा चुनाव से भले ही कम सक्रिय रहीं हो, लेकिन जीत का सेहरा कांग्रेस के सिर बंधता रहा है। चुनाव के कुछ आकड़ो पर नजर डालें तो तो विधानसभा में भाजपा व जनता सेना के आपसी कलह का फायदा कांग्रेस ने उठाते हुए जीत दर्ज की। कानोड़ नगर पालिका में कांग्रेस के राजयोग ने साथ दिया और लॉटरी से निकले परिणामों में अध्यक्ष - उपाध्यक्ष दोनों ही पदों पर जीत दर्ज करते हुए बोर्ड बनाने में सफलता हासिल की।
पंचायत समिति किसके हाथ
चुनाव तिथि से पहले उम्मीदवारों के नामों की घोषणा को लेकर राजनीतिक दलों में चिंतन मनन चालू है। उम्मीदवारों के नाम से पहले लोगों में उनके नाम को लेकर उत्सुकता बनी हुई है। कांग्रेस, भाजपा और जनता सेना के दावेदारों की ये खुशियां देखते ही बन रही है। हर स्तर पर दावेदार तैयारियां भी करने लगे हैं। इसके चलते पंचायत समिति के प्रधान पद पर कौन सा दल जीत दर्ज कराएगा। इसे लेकर फिलहाल कयास लगाना भी जल्दबाजी होगी। बता दें कि यहां भाजपा-कांग्रेस ने मिलकर कांग्रेस का बोर्ड बनाया था। कांग्रेस की यशोधरा कुंवर चावड़ा प्रधान बनीं, लेकिन जनता सेना व कांग्रेस ने मिलकर कांग्रेस की प्रधान को अविश्वास प्रस्ताव लाकर पदच्युत कर दिया। ड्रामेबाजी में कांग्रेस व जनता सेना की खूब फजीती हुई। प्रधान के हटने के बाद उनके पति कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कुबेर सिंह चावड़ा ने कांग्रेस के विधायक गजेन्द्र सिंह को जिम्मेदार ठहराते हुए बगावती तेवर दिखाए। विधानसभा चुनाव में चावड़ा कांग्रेस के लिए कहीं सक्रिय नहीं दिखें, लेकिन कांग्रेस जीत गई। udaipur political news ऐसे में इस बार चावड़ा दंपती फिर से पंचायत समिति में जाने का मन बना चुके है , टिकिट मिले या न मिले चावड़ा दंपती का चुनाव लडऩा तय माना जा रहा है ।