उदयपुर

उदयपुर : प्रो. ढाका बहाली मामला: हाईकोर्ट की खंडपीठ ने लगाई अंतरिम रोक

राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर खंडपीठ ने प्रो. महेंद्र सिंह ढाका की बहाली से जुड़े एकलपीठ के अंतरिम आदेश पर रोक लगा दी है। मामले की अगली सुनवाई 8 सितंबर को होगी, तब तक ढाका की बहाली पर रोक प्रभावी रहेगी।
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Aug 08, 2026
राजस्थान होईकोर्ट की जोधपुर खंडपीठ
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उदयपुर. राजस्थान होईकोर्ट की जोधपुर खंडपीठ ने मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय की विशेष अपील पर सुनवाई करते हुए पूर्व प्रोफेसर महेंद्र सिंह ढाका की बहाली से जुड़े एकलपीठ के अंतरिम आदेश पर रोक लगा दी है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायाधीश संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने 6 अगस्त को यह आदेश जारी किया।

मामला वर्ष 2010 में सुखाड़िया विश्वविद्यालय में हुई भर्ती प्रक्रिया और प्रो. ढाका की सेवा समाप्ति से जुड़ा है। उनकी नियुक्ति में फर्जीवाड़े और नियमों के उल्लंघन की शिकायतें मिलने पर कुलाधिपति ने वर्ष 2022 में जांच कमेटी का गठन किया था। मई 2023 में सौंपी गई जांच रिपोर्ट में सामने आया कि प्रो. ढाका की नियुक्ति ओबीसी आरक्षित पद पर बिना वैध प्रमाण-पत्र और यूजीसी नियमों को दरकिनार कर की गई थी। रिपोर्ट के आधार पर प्रताप नगर थाने में मामला दर्ज किया गया, जिसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने 23 दिसंबर 2025 को उन्हें बर्खास्त कर दिया था।

अगली सुनवाई 8 सितंबर को

उधर, बर्खास्तगी के खिलाफ प्रो. ढाका ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की, लेकिन पहली उन्हें कोई राहत नहीं मिली। इसके बाद दूसरी याचिका पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने 27 मई 2026 को अंतरिम रोक लगा दी थी, जिससे करीब 6 महीने बाद उनकी पुनः बहाली का रास्ता साफ हो गया था। विश्वविद्यालय प्रशासन ने एकलपीठ के इस फैसले को खंडपीठ में चुनौती दी। विश्वविद्यालय के अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि प्रो. ढाका को राज्यपाल के निर्देश पर गठित जांच कमेटी की रिपोर्ट के बाद ही बर्खास्त किया गया था। खंडपीठ ने विश्वविद्यालय के पक्ष को स्वीकार करते हुए एकलपीठ के अंतरिम आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी। अदालत ने इस मामले में प्रो. ढाका को नोटिस जारी किया है। प्रकरण की अगली सुनवाई 8 सितंबर को होगी, तब तक अंतरिम स्थगन आदेश प्रभावी रहेगा।

इधर, हाईकोर्ट बेंच की मांग: धरना-प्रदर्शन, कलक्टर को दिया ज्ञापन

मेवाड़-वागड़ क्षेत्र में राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ स्थापित करने की मांग को लेकर अधिवक्ताओं ने शुक्रवार को धरना-प्रदर्शन कर ज्ञापन दिया। बार एसोसिएशन उदयपुर और मेवाड़-वागड़ हाईकोर्ट बेंच संघर्ष समिति के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को जिला एवं सेशन न्यायालय परिसर में मासिक धरना-प्रदर्शन किया गया। अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य नहीं करते हुए आवाज बुलंद की।

बार अध्यक्ष जितेंद्र जैन ने बताया कि धरने के बाद जिला कलेक्टर को भी ज्ञापन सौंपा गया। कहा कि मेवाड़-वागड़ क्षेत्र के लोगों को उच्च न्यायालय संबंधी मामलों के लिए दूर जाना पड़ता है। ऐसे में उदयपुर में खंडपीठ की स्थापना से क्षेत्रवासियों को सस्ता, सुलभ और त्वरित न्याय उपलब्ध हो सकेगा। उनका कहना है कि यह केवल अधिवक्ताओं की मांग नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की जनता से जुड़ा विषय है। धरने में उपाध्यक्ष महेंद्र, सचिव आशीष कुमार कोठारी, वित्त सचिव धर्मेंद्र सोनी, पुस्तकालय सचिव विनोद औदिच्य, पूर्व अध्यक्ष मनीष शर्मा, रामकृपा शर्मा सहित वरिष्ठ, युवा और महिला अधिवक्ता मौजूद रहे।

हर माह 7 तारीख को न्यायिक कार्य का बहिष्कार

समिति के अनुसार हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर प्रत्येक माह की 7 तारीख को अधिवक्ता न्यायिक कार्य स्थगित कर आंदोलन में शामिल होते हैं। पदाधिकारियों ने कहा कि जब तक उदयपुर में हाईकोर्ट की खंडपीठ स्थापित नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।

Updated on:
08 Aug 2026 06:33 pm
Published on:
08 Aug 2026 06:33 pm