
उदयपुर. सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क की लायन सफारी में रविवार को मातम छा गया। करीब तीन महीने से बीमारी से जूझ रही साढ़े पांच वर्ष की शेरनी सुनैना ने दम तोड़ दिया। सुबह से ही उसकी हालत नाजुक थी। वन विभाग के कर्मचारी और चिकित्सक उसकी लगातार निगरानी कर रहे थे, लेकिन दोपहर को सुनैना को मृत पाया गया। उसकी मौत के साथ ही लायन सफारी में उसका साथी सम्राट अब अकेला रह गया है। सुनैना और सम्राट को जुलाई 2024 में गुजरात के शक्करबाग जू से उदयपुर लाया गया था। दोनों करीब दो साल से लायन सफारी का हिस्सा थे और साथ रह रहे थे। बीमारी के दौरान सुनैना को लायन सफारी के होल्डिंग एरिया में चिकित्सकों की निगरानी में रखा गया था। उधर, वन विभाग सम्राट के स्वास्थ्य, खान-पान और व्यवहार पर नजर रख रहा है। उसकी गतिविधियों में किसी तरह का बदलाव होने पर चिकित्सकीय निगरानी भी की जाएगी। पिछले एक माह में पार्क में सुनैना सहित छह वन्यजीवों की मौत हो चुकी है। इनमें तीन एमू और दो इगुआना शामिल हैं।
एक बार तो ठीक हो गई थी
वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. हिमांशु व्यास ने बताया कि मई में सुनैना के बीमार होने पर उसकी जांच कराई गई थी। जांच में हीट स्ट्रोक के साथ किडनी और लीवर में संक्रमण सामने आया था। बाद में वह स्वस्थ हो गई थी। फिर ब्लड सैंपल की जांच में टिक जनित रोग सामने आया। इसके लिए उसे 28 दिन का उपचार दिया गया, जिसका कोर्स 13 अगस्त को पूरा हुआ। उपचार के बाद सुनैना पूरी तरह सामान्य थी और प्रतिदिन आराम से खाना खा रही थी। 21 अगस्त को सुनैना ने अचानक खाना छोड़ दिया। इसके बाद उसके ब्लड सैंपल की जांच कराई गई, जिसमें सभी रिपोर्ट सामान्य आई। चिकित्सकों ने सोमवार को दोबारा ब्लड की जांच कर उसकी स्वास्थ्य स्थिति की समीक्षा करने की तैयारी की थी, लेकिन इससे पहले ही उसकी मौत हो गई। सूचना मिलते ही वन अधिकारी मौके पर पहुंचे। मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराने के बाद बायोलॉजिकल पार्क परिसर स्थित श्मशान में नियमानुसार उसका अंतिम संस्कार किया गया। पोस्टमार्टम में सुनैना की मौत हृदय संबंधी बीमारी के कारण होना सामने आया।
रात में भी पास रहते थे केयरटेकर
बीमारी के बाद से केयरटेकर भूरीलाल और मानाराम उसकी देखभाल कर रहे थे। उसकी हालत देखते हुए दोनों रात में भी उसके पास ही रुकते थे। सुनैना की मौत के बाद उसकी देखभाल में जुटी पूरी टीम भावुक हो गई। केयरटेकर और टीम के सदस्यों के अनुसार सुनैना का स्वभाव काफी शांत था। वह अपने केयरटेकर को आसानी से अपने पास आने देती थी और उनकी मौजूदगी में सहज रहती थी।
पार्क की शुरुआत में आए थे 12 एमू, तीन की मौत
बायोलॉजिकल पार्क की शुरुआत वर्ष 2012 में हुई थी। उस समय यहां 12 एमू लाए गए थे। इनमें से तीन एमू की पिछले दिनों मौत हो गई। वन विभाग के अनुसार इनकी मौत के कारणों की स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है।
बायोलॉजिकल पार्क में रैप्टाइल हाउस के उद्घाटन के दौरान इसी वर्ष गुजरात के एकतानगर जू से चार इगुआना लाए गए थे। इनमें से दो की पिछले दिनों मौत हो चुकी है। वन विभाग के अनुसार इगुआना की मौत बीमारी के कारण हुई। अब चार में से दो इगुआना ही बचे हैं।