
इसरो (Photo - ANI)
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो (ISRO) ने आमजन के जीवन को सुगम बनाने से लेकर अंतरिक्ष में भारत (India) की नई उड़ान तक की कहानी लिखी है। अब देश में नए अंतरिक्ष स्टार्टअप्स भी सामने आए हैं। आज, यानी 23 अगस्त को देश में राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर इसरो सेंटर अहमदाबाद के वरिष्ठ वैज्ञानिक निशांत जायसवाल से राजस्थान पत्रिका ने खास बातचीत की। पढि़ए उस बातचीत के कुछ चुनिदा अंश।
सवाल: राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस क्यों खास है?
जवाब: 23 अगस्त 2023 को चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर की चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफल लैंडिंग हुई थी। इसी उपलब्धि की याद में भारत में उसके बाद से हर साल इस दिन राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस मनाया जाता है।
सवाल: आमजन और पर्यावरण के लिए इसरो की तकनीक कितनी उपयोगी है?
जवाब: सैटेलाइट से बाढ़, तूफान और मौसम की रियल-टाइम जानकारी मिलती है। टेली-मेडिसिन, टेली-एजुकेशन, वन निगरानी तथा मिट्टी की नमी और फसल की स्थिति का आकलन भी संभव है। ऐसे में आमजन और पर्यावरण के लिए इसरो की तकनीक काफी उपयोगी है।
सवाल: निसार मिशन की उपयोगिता क्या है?
जवाब: इइसरो और नासा का जॉइंट निसार मिशन भूकंप, बाढ़, भूस्खलन, वन क्षेत्र, कृषि, मिट्टी की नमी और ग्लेशियरों में बदलाव की निगरानी करेगा। बादल और खराब मौसम में भी इसका डेटा उपयोगी रहेगा।
सवाल: इसरो के प्रमुख आगामी मिशन कौनसे हैं?
जवाब: चंद्रयान-4 का लक्ष्य चंद्रमा से मिट्टी और पत्थरों के नमूने पृथ्वी पर लाना है। चंद्रयान-5/ल्यूपेक्स में जापान सहयोगी है। भारत अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने और 2040 तक मानव को चंद्रमा पर भेजने की दिशा में काम कर रहा है। शुक्रयान मिशन शुक्र के वातावरण और सतह का अध्ययन करेगा।
सवाल: निजी स्पेस स्टार्टअप्स से इसरो को प्रतिस्पर्धा मिलेगी?
जवाब: इसे प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि नए हाथों का जुड़ना कहना चाहिए। तकनीक ट्रांसफर के जरिए निजी कंपनियों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे अंतरिक्ष तकनीक का लाभ अधिक लोगों तक पहुंचेगा।
सवाल: युवा इसरो वैज्ञानिक कैसे बन सकते हैं?
जवाब: 12वीं विज्ञान-गणित के बाद बीई/बीटेक या संबंधित एमएससी कर युवा राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा देकर लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के माध्यम से चयनित हो सकते हैं।
Updated on:
23 Aug 2026 03:40 am
Published on:
23 Aug 2026 03:37 am
