उदयपुर

उदयपुर : स्क्रॉल करते रहो… देखते रहो… अब सोशल मीडिया के इसी डिजाइन पर अदालत में चुनौती

उदयपुर की बेटी शुभिका जोशी ने सोशल मीडिया के ‘एडिक्टिव डिजाइन’ के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका में याचिकाकर्ता अधिवक्ता के रूप में जगह बनाई है।
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Sep 11, 2026
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उदयपुर. सोशल मीडिया पर घंटों बिताने की वजह सिर्फ उपयोगकर्ता की आदत नहीं, बल्कि प्लेटफॉर्म का ऐसा डिजाइन भी हो सकता है, जो उसे बार-बार लौटने और ज्यादा देर तक जुड़े रहने के लिए प्रेरित करता है। इसी सवाल को अब दिल्ली हाईकोर्ट में कानूनी चुनौती दी गई है। खास बात यह है कि इस महत्वपूर्ण मामले में याचिकाकर्ता अधिवक्ताओं में उदयपुर की बेटी शुभिका जोशी भी शामिल हैं।

कानून के प्रोफेसर डॉ. विकास कथूरिया की ओर से दायर जनहित याचिका में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के कंटेंट के बजाय उनके डिजाइन और आर्किटेक्चर को सीधे सवालों के घेरे में लिया गया है। याचिका में भारत में ऐसे डिजाइन फीचर्स पर रोक, नियंत्रण या नियमन की मांग की गई है, जो उपयोगकर्ताओं को सोशल मीडिया के अत्यधिक और समस्याग्रस्त इस्तेमाल की ओर धकेलते हैं।

याचिका में कहा गया कि प्लेटफॉर्म्स में इस्तेमाल होने वाले कई फीचर्स उपयोगकर्ता का ध्यान लगातार बनाए रखने के लिए डिजाइन किए जाते हैं। इनमें इनफिनिट स्क्रॉल, ऑटोप्ले, एल्गोरिदम आधारित क्यूरेटेड फीड, लगातार आने वाले नोटिफिकेशन और लाइक्स जैसे वैरिएबल-रिवॉर्ड फीचर्स शामिल हैं। याचिका में इन्हीं फीचर्स को प्रतिबंधित, नियंत्रित अथवा विनियमित करने के लिए निर्देश जारी करने की मांग की गई है।

मुद्दा कंटेंट का नहीं, डिजाइन का

याचिका का अहम पहलू है कि सोशल मीडिया पर उपलब्ध सामग्री की वैधता के बजाय उस तकनीकी व्यवस्था पर सवाल उठाया गया है, जिसके जरिये उपयोगकर्ता का ध्यान लगातार प्लेटफॉर्म पर बनाए रखा जाता है। याचिका में विशेष रूप से बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य, कल्याण और विकास पर इसके संभावित प्रतिकूल प्रभाव को लेकर चिंता जताई गई है। याचिका में यह भी मांग की गई है कि जब तक इस विषय पर कानून नहीं बनता, तब तक अदालत उचित दिशा-निर्देश जारी करे।

जज के रिक्यूजल के बाद बदली बेंच

मामला 9 सितंबर को दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सूचीबद्ध था। हालांकि, पीठ के एक न्यायाधीश के मामले से अलग होने यानी रिक्यूजल के बाद अब इस मामले को अगले सप्ताह किसी अन्य पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाएगा। ऐसे में अगली सुनवाई पर नजर रहेगी, क्योंकि मामला सोशल मीडिया के कंटेंट से आगे बढ़कर उसके 'एडिक्टिव डिजाइन' और उपयोगकर्ता के व्यवहार पर पड़ने वाले प्रभाव को कानूनी कसौटी पर लाने की कोशिश कर रहा है।

Updated on:
11 Sept 2026 05:46 pm
Published on:
11 Sept 2026 05:46 pm