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Udaipur : अनूठी मिसाल, मौत के बाद भी बना रहा पति-पत्नी का साथ, चंद्रा खमेसरा ने चिकित्सा शिक्षा के लिए की देहदान

Udaipur : उदयपुर से सामने आई अनूठी मिसाल। जीवन ही नहीं, मौत के बाद भी पति-पत्नी का साथ बना रहा। चंद्रा खमेसरा ने पति राजेंद्र सिंह खमेसरा के पदचिह्नों पर चलते हुए मृत्यु के बाद अपना शरीर चिकित्सा शिक्षा के लिए समर्पित कर दिया।
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Udaipur unique example Wife Chandra Khamesara donated her body

Udaipur : बुजुर्ग महिला चंद्रा खमेसरा। फोटो पत्रिका

Udaipur : उदयपुर से एक अनूठी मिसाल सामने आई। जीवन ही नहीं, मौत के बाद भी बना रहा पति-पत्नी का साथ। सी/4 पेबल हाइट्स न्यू नवरत्न, भुवाणा निवासी चंद्रा खमेसरा (84 वर्ष) ने पति राजेंद्र सिंह खमेसरा के पदचिह्नों पर चलते हुए मृत्यु के बाद अपना शरीर चिकित्सा शिक्षा के लिए समर्पित कर दिया। वर्ष 2019 में उनके पति राजेंद्र सिंह का भी देहदान किया गया था। अब पत्नी के देहदान के साथ इस परिवार ने चिकित्सा शिक्षा के लिए एक और मिसाल कायम की है।

चंद्रा खमेसरा के देहदान के बाद उनका शरीर आरएनटी मेडिकल कॉलेज के मेडिकल विद्यार्थियों के अध्ययन में उपयोग होगा। आरएनटी मेडिकल कॉलेज उदयपुर में इस वर्ष यह 10वां देहदान हैं। विद्यार्थी मानव शरीर की वास्तविक संरचना, अंगों की बनावट और उनके आपसी संबंधों को प्रत्यक्ष रूप से समझ सकेंगे। एनाटॉमी की पढ़ाई में कैडेवर का अध्ययन भावी चिकित्सकों को किताबी ज्ञान के साथ व्यावहारिक समझ देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

बेटियां-दामाद आगे आए

चंद्रा खमेसरा के देहदान में उनकी तीन बेटियों और दामाद की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुत्री डॉ. रेणु खमेसरा ने कहा मां ने अपने जीवन में हमेशा समाज के लिए कुछ करने की भावना रखी। पिता के देहदान के बाद अब मां का भी यही निर्णय परिवार के लिए भावनात्मक होने के साथ गर्व का विषय है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 में पिता के देहदान के बाद परिवार ने देखा कि उनका शरीर मेडिकल विद्यार्थियों की शिक्षा के काम आ रहा है। इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए मां ने भी अपना शरीर चिकित्सा शिक्षा के लिए देने का निर्णय लिया था। यह योगदान आने वाली पीढ़ियों के चिकित्सकों की पढ़ाई में काम आएगा।

RNT मेडिकल कॉलेज उदयपुर में बना है देहदान स्मारक

रवींद्र नाथ टैगोर मेडाकल कॉलेज परिसर में 24 मार्च, 2021 में कॉलेज में स्व. सौभाग मल जैन की स्मृति में देहदान स्मारक बनाया गया। यह भारत का एकमात्र देहदान स्मारक है।

जानें देहदान के नियम

अगर कोई भी व्यक्ति स्वेच्छा से देहदान करना चाहता है तो इसके लिए कोई भी कठोर नियम नहीं है। वह मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी विभाग में जा कर एक शपथ पत्र भर सकता है। साथ ही उसके परिवार के 2 सदस्यों की स्वीकृति हस्ताक्षर करवा कर जमा कराना होता है। व्यक्ति की मृत्यु के तुरंत बाद (6 से 8 घंटे के भीतर) परिजनों द्वारा पार्थिव शरीर को बिना किसी धार्मिक संस्कार (दाह-संस्कार) के सीधे मेडिकल कॉलेज के सुपुर्द कर दिया जाता है।