उदयपुर की 42 वर्षीय सोफिया जैपुरी महिलाओं के लिए प्रेरणा बनी हैं। प्रमाणित कला शिक्षिका और ग्रामीण विकास कार्यकर्ता सोफिया ने अब तक 2500 से ज्यादा महिलाओं को नि:शुल्क कला प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाया।
उदयपुर: 42 वर्षीय सोफिया जैपुरी उन महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं, जो घर की चारदीवारी में रहते हुए भी अपने हुनर से पहचान बनाना चाहती हैं। सोफिया कुशल कलाकार होने के साथ-साथ प्रमाणित कला शिक्षिका और ग्रामीण विकास व महिला सशक्तीकरण कार्यकर्ता हैं।
वे उन महिलाओं के जीवन में नई रोशनी लाई हैं, जो सामाजिक या पारिवारिक बंधनों के कारण घर से बाहर जाकर काम नहीं कर पातीं। वे इन महिलाओं को नि:शुल्क कला व आर्ट एंड क्राफ्ट का प्रशिक्षण देती हैं। उनके बनाए उत्पादों को बेचने में मदद भी करती हैं। इससे महिलाएं न सिर्फ आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि आत्मसम्मान और पहचान को भी नई उड़ान दे रही हैं।
सोफिया को यह प्रेरणा तब मिली, जब चचेरी बहन को आर्थिक परेशानी से जूझते देखा। वे घर के बाहर जाकर काम नहीं कर सकती थी, न परिवार का सहारा था। तब सोचा कि उनके जैसी और भी महिलाएं हैं, जिन्हें मौका नहीं मिलता। पहले घर की महिला हेल्पर को जोड़ा फिर पास की अन्य महिलाओं को। आज उनके साथ नौ महिलाएं स्थायी जुड़ी हैं, जो रोजगार चला रही हैं।
सोफिया और उनकी टीम के बनाए उत्पाद पूरी तरह हैंडमेड हैं। उनकी टीम रेजिन कला, क्रोशिए कार्य, गोटा कढ़ाई, हैंड पेंटिंग, कला व शिल्प उत्पाद और शादी-विवाह की पैकिंग सामग्री तैयार करती है। इन उत्पादों से महिलाएं न सिर्फ आय अर्जित कर रही हैं, बल्कि उदयपुर की पारंपरिक कला को भी नए रूप में आगे बढ़ा रही हैं। प्रशिक्षित महिलाओं के हस्तनिर्मित उत्पादों की प्रदर्शनी उदयपुर में समय-समय पर लगाई जाती है, जहां अपना हुनर दिखाने और बिक्री का मंच मिलता है।
सोफिया के कार्यों को न सिर्फ स्थानीय स्तर पर बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी सराहना मिली। उन्हें जी-20 कार्यक्रम में शिल्पग्राम का दर्पण द्वार डेकोरेट करने का मौका मिला, जो उनके और टीम के लिए गर्व का क्षण था।
सोफिया 2023 से अब तक 2500 से ज्यादा को हैंडमेड आइटम्स का प्रशिक्षण दे चुकीं। 100 से अधिक महिलाओं के उत्पादों की प्रदर्शनी लगवाई हैं, जहां सामान बेचने का मौका मिला। वे स्कूल और कॉलेजों में नि:शुल्क वर्कशॉप्स करती हैं।