
उदयपुर. झीलों की नगरी में मौसम का मिजाज तेजी से बदलने लगा है। पिछले दो-तीन दिन से शहर में ठंडक का एहसास बढ़ गया है, जिससे सुबह-शाम के समय महसूस होने वाली गर्मी पूरी तरह गायब हो चुकी है। दिन में भी चटक धूप का तीखापन कम होकर अब धूप हल्की लगने लगी है। पिछले दिनों हुई बूंदाबांदी के बाद पारे में जो हल्की बढ़ोतरी हुई थी, वह अब फिर से ढलान पर है और तापमान में गिरावट का दौर शुरू हो गया है।
मौसम विभाग के मुताबिक पिछले 24 घंटे में रात के तापमान में 3.1 डिग्री की गिरावट आई है। मंगलवार को जहां न्यूनतम तापमान 19.1 डिग्री था, वहीं बुधवार को लुढ़ककर 16 डिग्री पर आ गया, जो सामान्य औसत के बराबर दर्ज किया गया। वहीं, अधिकतम तापमान भी 32 डिग्री से घटकर 31.2 डिग्री दर्ज हुआ, जो औसत तापमान से 1 डिग्री कम रहा। दिन और रात दोनों समय पारे के इस रुख से शहरवासियों को सर्दी की स्पष्ट आहट मिलने लगी है।
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक आंध्रप्रदेश तट पर लैंडफॉल कर चुके चक्रवात 'अर्नब' का असर भी प्रदेश के मौसम तंत्र पर पड़ने वाला है। हालांकि यह चक्रवात सीधे राजस्थान की सीमा में दाखिल नहीं होगा और अंदरूनी इलाकों में आगे बढ़ते हुए कमजोर पड़ जाएगा, लेकिन इसके असर से सक्रिय हो रहे नए वेदर सिस्टम और पूर्वी हवा के कारण गुरुवार-शुक्रवार को उदयपुर सहित कई संभागों में मौसम बदलेगा।
दो दिन ऐसा रहेगा मौसम का रुख
-पूर्वी हवा के प्रभाव से उदयपुर, जयपुर, अजमेर, कोटा और भरतपुर संभाग में बादलों की आवाजाही के साथ मेघगर्जन और बारिश की संभावना।
- जयपुर-भरतपुर संभाग में 40-50 किमी/घंटा की रफ्तार से हवा चलेगी व कहीं-कहीं ओलावृष्टि के आसार, जोधपुर-बीकानेर में छिटपुट बौछारें संभव।
-तीसरे दिन शनिवार को पूर्वी हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है, इसके बाद चक्रवाती तंत्र का असर धीरे-धीरे धीमा पड़ेगा।
पूर्वी तट पर आए चक्रवात का उदयपुर पर असर
पूर्वी तट पर आने वाले चक्रवात का उदयपुर और मेवाड़ पर सीधा असर आमतौर पर सीमित रहता है, लेकिन इसके कारण राजस्थान के मौसम में अप्रत्यक्ष बदलाव संभव है।
- बारिश: चक्रवात की दिशा और नमी के प्रसार के आधार पर उदयपुर में बादलों की आवाजाही या हल्की बारिश हो सकती है।
- तापमान: बादल छाने से दिन के तापमान में गिरावट आ सकती है, जबकि रात के तापमान में बदलाव संभव है।
- हवा: स्थानीय हवाओं की गति और दिशा में परिवर्तन हो सकता है।
- मौसम पर प्रभाव: चक्रवात कमजोर होकर आगे बढ़ता है या उसका असर मध्य भारत तक पहुंचता है, तो मौसम में बदलाव संभव है।