
उदयपुर.उमरड़ा के खेड़ा गांव में महिला समेत पांच लोगों पर हमला करने वाला पैंथर अब भी वन विभाग की पकड़ से बाहर है। आबादी क्षेत्र के आसपास निगरानी के बावजूद उसकी लोकेशन का पता नहीं चल पाया है। पैंथर की तलाश के लिए वन विभाग ने इलाके में 35 कैमरे लगाए हैं। इनमें सबसे ज्यादा कैमरे उन नालों और जलस्रोतों के आसपास लगाए गए हैं, जहां पैंथर के आने की संभावना जताई जा रही है।
उपवन संरक्षक उदयपुर (उत्तर) डीके तिवारी बुधवार सुबह से ही मौके पर मौजूद हैं। उनके नेतृत्व में वन विभाग की 33 सदस्यीय टीम इलाके में लगातार निगरानी कर रही है।
रेत भी बनेगी पैंथर की लोकेशन ट्रेस
वन विभाग ने पैंथर की तलाश के लिए सिर्फ कैमरों पर निर्भर रहने के बजाय उसके पगमार्कपकड़ने की भी तैयारी की है। संभावित आवाजाही वाले रास्तों पर रेत के बैच बनाए गए हैं। पैंथर इनके ऊपर से गुजरता है तो उसके पदचिह्न मिल सकेंगे और उसकी दिशा का अंदाजा लगाया जा सकेगा। पिछले दिनों ग्रामीणों ने भी आबादी के आसपास पैंथर की मौजूदगी की बात कही थी।
एक की मौत, चार और घायल
पैंथर के हमले में मारे गए लोगरलाल मीणा (45) का गुरुवार को मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराने के बाद अंतिम संस्कार कर दिया गया। वहीं घायल जग्गा मीणा (60), हितेश (20), कालू (40) और लोगरी बाई (45) का अभी उपचार जारी है। ग्रामीणों के अनुसार जग्गा, हितेश और कालू ने करीब पांच मिनट तक पैंथर का सामना किया। शोर सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे तो पैंथर जंगल की तरफ भाग गया।
मृतक के परिवार को 10 लाख
वन विभाग के अनुसार मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर मृतक के आश्रित परिवार को 10 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी। गंभीर रूप से घायल लोगों को दो-दो लाख की सहायता का प्रावधान है। विभाग मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार सहायता की प्रक्रिया पूरी करेगा।
पहाड़ इनके प्राकृतिक आवास
उदयपुर की पहाड़ियां लंबे समय से पैंथर के प्राकृतिक आवास का हिस्सा रही हैं। हाल के दिनों में पहाड़ी और वन क्षेत्र से पैंथर की मौजूदगी की खबरों ने एक बार फिर वन्यजीव प्रेमियों और स्थानीय लोगों का ध्यान खींचा है। आबादी और जंगलों के बीच बढ़ती नजदीकी के कारण कई बार पैंथर रिहायशी इलाकों के आसपास भी नजर आ जाते हैं। बारिश के मौसम में पहाड़ियों पर हरियाली बढ़ने और प्राकृतिक जलस्रोत सक्रिय होने से वन्यजीवों की गतिविधियां भी बढ़ जाती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार पैंथर सामान्यतः इंसानों से दूरी बनाए रखते हैं और बिना उकसावे के हमला करना उनका स्वभाव नहीं है। ऐसे में पहाड़ी क्षेत्रों में घूमने वाले लोगों को सतर्क रहने, अकेले जंगल में नहीं जाने और वन्यजीव दिखाई देने पर उसके करीब जाने या भीड़ लगाने से बचना चाहिए। उदयपुर की पहाड़ियां इन खूबसूरत वन्यजीवों का प्राकृतिक घर हैं, इसलिए इनके संरक्षण के साथ मानव-वन्यजीव सहअस्तित्व पर भी ध्यान देना जरूरी है।