उदयपुर

वर्ल्ड हीमोफीलिया : छोटी सी चोट भी जानलेवा, क्लोटिंग फेक्टर की कमी से जूझ रहे शहर में 400 से ज्यादा मरीज

विशेषज्ञ बताते हैं कि कई मामलों में मरीजों को समय पर पहचान और इलाज नहीं मिल पाता, इससे स्थिति और गंभीर हो जाती है।

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Apr 17, 2026
हर साल 17 अप्रैल को मनाए जाने वाले विश्व हीमोफीलिया दिवस की इस वर्ष की थीम निदान: देखभाल का पहला कदम इसी ओर इशारा करती है कि समय पर पहचान ही मरीजों की जिंदगी बचा सकती है।

समय पर उपचार और जागरूकता ही इस गंभीर रोग की सबसे बड़ी ढाल

उदयपुर. शहर में 400 से ज्यादा लोग हीमोफीलिया जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं, यह इसलिए खतरनाक है कि मामूली चोट भी इसमें जानलेवा बन सकती है। हीमोफीलिया मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है हीमोफीलिया ए, जिसमें शरीर में फैक्टर 8 का स्तर कम होता है, और हीमोफीलिया बी, इसमें फैक्टर 9 की कमी होती है।

हीमोफीलिया एक गंभीर आनुवंशिक बीमारी है, जो मुख्य रूप से पुरुषों में अधिक पाई जाती है। इस बीमारी में शरीर में खून जमाने वाले तत्व, जिन्हें क्लॉटिंग फैक्टर कहा जाता है (जैसे फैक्टर 8, 9) की कमी हो जाती है। सामान्य व्यक्ति को चोट लगने पर खून कुछ ही समय में रुक जाता है, लेकिन हीमोफीलिया मरीजों में यह प्रक्रिया बहुत धीमी हो जाती है या कई बार खून रुकता ही नहीं है। इसके कारण न सिर्फ बाहरी चोट से बल्कि आंतरिक रक्तस्राव का भी खतरा बना रहता है, जो जोड़ों, मांसपेशियों और शरीर के अन्य अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। हीमोफीलिया का स्थायी इलाज भले ही अभी उपलब्ध नहीं है, लेकिन सही समय पर उपचार से मरीज सामान्य जीवन जी सकता है। अस्पतालों में क्लॉटिंग फैक्टर (फैक्टर 8 और 9) उपलब्ध हैं, इनकी मदद से रक्तस्राव को रोका जा सकता है। एमबी हॉस्पिटल में ये सुविधाएं उपलब्ध होने से मरीजों को काफी राहत मिल रही है।

इस साल की थीम

हर साल 17 अप्रैल को मनाए जाने वाले विश्व हीमोफीलिया दिवस की इस वर्ष की थीम निदान: देखभाल का पहला कदम इसी ओर इशारा करती है कि समय पर पहचान ही मरीजों की जिंदगी बचा सकती है। हीमोफीलिया एक अनुवांशिक रक्त विकार है, जिसमें खून का थक्का बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है, जिससे मरीजों के लिए हर दिन एक चुनौती बन जाता है।

हर दिन चुनौतीपूर्ण जीवन

एमबी हॉस्पिटल में करीब 300 रजिस्टर्ड हीमोफीलिया मरीज, वही हिमोफिलिया सोसाइटी के 100 से ज्यादा मरीज दर्ज हैं। इनमें कई बच्चे और युवा शामिल हैं, जिनके लिए सामान्य जीवन जीना भी चुनौतीपूर्ण है। खेलना, गिरना या हल्की चोट लगना भी उनके लिए खतरे से खाली नहीं होता। विशेषज्ञ बताते हैं कि कई मामलों में मरीजों को समय पर पहचान और इलाज नहीं मिल पाता, इससे स्थिति और गंभीर हो जाती है।

सरकारी योजनाओं से मिल रही बड़ी राहत

राज्य सरकार की मां योजना और निशुल्क निरोगी योजना के तहत हीमोफीलिया मरीजों का इलाज मुफ्त किया जा रहा है। इन योजनाओं ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बड़ी राहत का काम किया है। महंगे इलाज और दवाइयों का खर्च उठाना पहले मुश्किल होता था, लेकिन अब सरकारी सहयोग से मरीजों को समय पर उपचार मिल पा रहा है।

हीमोफीलिया पुरुषों में अधिक

यह रोग मुख्य रूप से पुरुषों में अधिक देखा जाता है क्योंकि यह एक आनुवंशिक विकार है जो एक्स-लिंक्ड रिसेसिव तरीके से वंशानुगत होता है। पुरुषों में केवल एक एक्स गुणसूत्र होता है, इसलिए यदि उसमें यह दोष मौजूद हो तो बीमारी सीधे विकसित हो जाती है। वहीं महिलाओं में दो एक्स गुणसूत्र होने के कारण एक स्वस्थ जीन दूसरे दोषपूर्ण जीन की भरपाई कर देता है, इसलिए वे आमतौर पर केवल वाहक होती हैं और उनमें बीमारी के लक्षण कम या नहीं के बराबर दिखाई देते हैं।

जागरूकता की कमी अब भी बड़ी चुनौती

हीमोफीलिया को लेकर जागरूकता की कमी अब भी बड़ी समस्या है। कई ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इस बीमारी को समझ नहीं पाते और इलाज में देरी हो जाती है। यदि शुरुआती लक्षणों जैसे बार-बार खून बहना, चोट के बाद खून देर तक न रुकना या जोड़ों में सूजन को नजरअंदाज न किया जाए, तो समय रहते इलाज संभव है।

डॉ आर. एल. सुमन, विशेषज्ञ व एमबी हॉस्पिटल अधीक्षक

Updated on:
17 Apr 2026 05:47 pm
Published on:
17 Apr 2026 05:46 pm
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