उदयपुर

शादी में नहीं आए भाई तो पुलिसकर्मियों ने भर दिया मायरा

Mar 17, 2026
एसआई रेणू खोईवाल ने बताया कि मीराबाई थाने में 25 साल से सेवाएं दे रही है। वे मां की तरह ख्याल रखती है। सभी को मनुहार करके खाना परोसती है। उसके हाथा से बने खाने में मां का प्यार झलकता है। ऐसे में भला मीरा को अकेले कैसे छोड़ देते।
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उदयपुर के प्रतापनगर थाने में 25 साल से कुक है मीराबाई

उदयपुर. बदमाशों के खिलाफ कार्रवाई करने की जिम्मेदारी, लेकिन अगर पुलिसकर्मी साफा बांधे, ढोल की थाप पर रंगीन थाल सजाकर शादी में पहुंचे तो नजारा ही कुछ अलग था। मामला शादी थाने की कुक के बेटे का है। उसके भाई मायरा लेकर नहीं पहुंचे तो पुलिसकर्मियों ने भाई का फर्ज निभाया और मायरे के थाल सजाकर पहुंच गए।यह है मामला

वाकया उदयपुर के प्रतापनगर थाने से जुड़ा है। थाने में करीब 25 साल से पुलिसकर्मियों के लिए खाना बनाती, सफाई करती मीराबाई के बेटे मुकेश गायरी की शादी का आयोजन था। थानाधिकारी सहित पूरी टीम रविवार को मीराबाई के सुंदरवास स्थित निवास पर पहुंची। इतने सालों से मीराबाई के हाथों का खाना खाने वाले पुलिसकर्मियों का दिल ऐसा पसीजा की भाईयों का फर्ज निभाने से पीछे नहीं रहे। पुलिसकर्मियों ने 1.11 लाख रुपए का मायरा भरा। थाने के सभी पुलिसकर्मियों के पहुंचने पर मीराबाई भावुक हो गई। उसके परिवार ने गाजे बाजे से स्वागत किया। थानाधिकारी पूरणसिंह राजपुरोहित ने मीराबाई को चुनर ओढ़ाई।

शादी के सालभर बाद पति को खोया

शादी के महज एक साल बाद ही हादसे में पति का निधन होने से मीराबाई पर मानो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था, क्योंकि वह 6 माह की गर्भवती थी और वह बेटा पेट में पल रहा था, जो पिता को देख भी नहीं पाया। परिवार चलाने के लिए मीराबाई थाने के साथ ही आसपास के घरों में बतौर कुक काम करने लगी।

नाराज भाईयों ने तोड़ दिया था मीरा का मन

मीराबाई के तीन भाई हैं, जिनमें से दो भाई किसी पारिवारिक विवाद के चलते नाराजगी रखते हैं। ऐसे में वे शादी में शामिल नहीं हुए। यह बात थाने की एसआई रेणु खोईवाल को चता चली तो आहत हो गई। उन्होंने उसी समय कह दिया था कि 'मीरा, चिंता मत करो, तुम्हारे भाई आएंगे और ऐसा मायरा लाएंगे कि तुम भी याद रखोगी'।-----

पुलिसकर्मी बोले- मां जैसा ख्याल रखती है मीरा

एसआई रेणू खोईवाल ने बताया कि मीराबाई थाने में 25 साल से सेवाएं दे रही है। वे मां की तरह ख्याल रखती है। सभी को मनुहार करके खाना परोसती है। उसके हाथा से बने खाने में मां का प्यार झलकता है। ऐसे में भला मीरा को अकेले कैसे छोड़ देते। पहल करके थानाधिकारी को बताया तो सभी साथी पुलिसकर्मी आगे आए और मायरा भरने की ठानी।

Updated on:
17 Mar 2026 05:45 pm
Published on:
17 Mar 2026 05:45 pm