उज्जैन

दीपोत्सव: कल से बाबा महाकाल बदल लेंगे अपनी दिनचर्या

राजाधिराज कल से गर्म जल से करेंगे स्नान
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Nov 05, 2018
patrika
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उज्जैन. हिन्दू धर्म में हर त्योहार सबसे पहले राजाधिराज महाकाल के दरबार में मनाया जाता है। इसके बाद अन्य स्थानों पर आयोजन होते हैं। दीपोत्सव की शुरुआत भी भगवान के आंगन से होगी। इसमें धनतेरस से गोवर्धन पूजन परंपरागत तरीके से किया जाएगा।
राजाधिराज के आंगन में दीपपर्व का उल्लास धनतेरस सोमवार से छाएगा। रूप चौदस पर भगवान महाकाल का रूप निखारने के लिए उबटन से स्नान कराया जाएगा। दीपावली पर तड़के भस्मआरती, संध्या तथा रात्रि को शयन आरती में दीपों और फूलझड़ी के साथ होगी। महाकाल मंदिर में प्रत्येक त्योहार एक दिन पहले मनाया जाता है। महाकाल मंदिर के पुजारी प्रदीप गुरु ने बताया कि 6 नवंबर को रूप चौदस पर महाकाल मंदिर में देव दीपावली मनेगी। तड़के 4 बजे भस्मारती में भगवान का पंचामृत अभिषेक होने के बाद पुजारी परिवार की महिलाएं भगवान महाकाल को उबटन लगाएंगी। इसके बाद भगवान को गर्मजल से स्नान कराया जाएगा। पुजारी राजा को इत्र लगाएंगे। कपूर से भगवान की आरती होगी। भांग व सूखे मेवे से आकर्षक शृंगार कर नवीन वस्त्र व आभूषण धारण कराए जाएंगे। अभिषेक, शृंगार व पूजन की प्रक्रिया संपन्न होने के बाद भगवान को अन्नकूट का नैवेद्य लगेगा। ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में ऋ तु अनुसार भगवान की सेवा होती है। सर्दी में भगवान को गर्मजल से स्नान कराया जाता है। इसकी शुरुआत रूप चौदस पर अभ्यंग स्नान के साथ होती है। ऋतु परिवर्तन के साथ राजाधिराज महाकाल की दैनिक गतिविधियों में बदलाव होता है। बाबा महाकाल ६ माह गर्म और ६ माह ठंडे जल से स्नान करते हैं। इस क्रम में कार्तिक की चौदस ६ नवंबर को गर्म स्नान शुरू करेंगे। यह सिलसिला फाल्गुन माह की पूर्णिमा तक चलेगा।
धनतेरस : पुरोहित समिति द्वारा धनतेरस पर भगवान महाकाल का विशेष पूजन किया जाता है। आरती के बाद भगवान पर चांदी के सिक्के न्योछावर किए जाते हैं।
गोवर्धन पूजन: दीपावली के अगले दिन मंदिर में गोवर्धन पूजा होती है। चिंतामण स्थित गोशाला में गायों का पूजन करने के बाद गोबर से बनाए गए गोवर्धन की पूजा की जाती है।
कार्तिक-अगहन मास में सवारी, वैकुंठ चतुर्दशी पर पर हरिहर मिलन
कार्तिक-अगहन मास में भी श्रावण-भादौ की तर्ज पर बाबा महाकाल की सवारी निकालने की परंपरा है। राजाधिराज भगवान महाकाल कार्तिक एवं अगहन मास में राजसी ठाठबाट से नगर भ्रमण पर निकलेंगे। इसमें दो सवारी कार्तिक मास और दो सवारी अगहन मास की रहेगी। वैकुंठ चतुर्दशी पर हरिहर मिलन की सवारी पर भगवान महाकाल रात 12 बजे भगवान गोपालजी से मिलने पहुंचेंगे। मंदिर के पुजारी प्रदीप गुरु के अनुसार कार्तिक-अगहन मास में भी प्रति सोमवार को मंदिर के आंगन से भगवान महाकाल की चार सवारी निकलती है। एक सवारी दीपावली के बाद वैकुंठ चतुर्दशी पर निकलेगी। इस बार कार्तिक मास में राजा महाकाल की प्रथम सवारी 12 नवंबर को निकाली जाएगी। दूसरी 19 नवंबर, तीसरी 26 नवंबर तथा शाही सवारी 3 दिसंबर को निकाली जाएगी। इसके अलावा वैकुंठ चतुर्दशी की तिथि ग्वालियर पंचाग और स्थानीय पंचाग में अलग-अलग होने से हरिहर मिलन की सवारी 21 नवंबर को निकलेगी। इस दिन भगवान महाकाल गोपालजी से मिलने जाएंगे। रात 12 बजे महाकाल की सवारी गोपाल मंदिर पहुंचेगी।

Published on:
05 Nov 2018 06:00 am