कम कीमत की प्रॉपर्टी की मिलीभगत से करवाई करोड़ों की वेल्यू, सीबीआई ने वेल्यूर को भी बनाया आरोपी
उज्जैन। पंजाब नेशनल बैंक कंठाल शाखा से कोयला व्यापारी करोड़ों रुपए लोन लेकर फरार हो गया है। कोयला व्यापारी को करोड़ों की सीसी लिमिट करवाने के लिए बैंक के वेल्यूर ने भी उसका साथ दिया। वेल्यूर ने उसकी कम भाव की प्रॉपर्टी को बैंक में करोड़ों रुपए का बताकर लिमिट बढ़वा ली। मामला उजागर होने के बाद सीबीआई ने इसकी जांच की और व्यापारी पिता-पुत्र सहित बैंक के वेल्यूर को भी आरोपी बनाया है।
वर्ष २०१२ में नलिया बाखल निवासी अर्पण ने पिता नरेंद्र प्रजापति की इंदौर रोड, नलियाबाखल, इंदौर के लसूडिया स्थित कोल स्टॉक गोडाउन आदि संपत्तियों को गिरवी रखकर चालू खाते पर ४ से ७ करोड़ रुपए की सीसी लिमिट ली। भोपाल निवासी राजेश श्रीवास्तव ने सीसी लिमिट के लिए संपत्तियों के बाजार भाव का वेल्यूशन किया, जिसमें कुल संपत्तियों की कीमत ११.६२ करोड़ रुपए आकलित की गई। जिस आधार पर अर्पण को बंैक ने इतनी अधिक सीसी लिमिट दी। इस आधार पर अर्पण ने ४.५० करोड़ रुपए का लोन लिया और फरार हो गया। लोन लेने के बाद से अर्पण ने एक भी किस्त नहीं चुकाई और उसका करंट अकाउंट नॉन प्रॉफिट अकाउंट में चला गया। जब बैंक ने उसकी गिरवी संपत्तियों को कुर्क करने की कार्रवाई की तो जानकारी मिली कि गिरवी रखी ज्यादातर संपत्तियां बेची जा चुकी हैं और संपत्तियों की वर्तमान कीमत आकलित कीमत से बेहद कम है। इसके बाद मामले में सीबीआई जांच शुरू की गई। रिकवरी शाखा इंदौर के मुख्य प्रबंधक विजय कुमार हरित ने बताया कि मामले में सीबीआई-एसीबी जबलपुर के एसपी पीके पांदे ने अर्पण प्रजापति, नरेंद्र प्रजापति, राजेश श्रीवास्तव सहित अन्य पर धोखाधड़ी, षड्यंत्र सहित अन्य गंभीर धाराओं में प्रकरण दर्ज किया है।
अन्य बैंकों से भी करोड़ों का लोन
अर्पण अनुपम ट्रेडिंग कंपनी नाम से फर्म संचालित करता है, जिसका मुख्य काम कोयले की ट्रेडिंग है। अनुपम ट्रेडिंग कंपनी के नाम से अर्पण ने अन्य बैंकों से भी करोड़ों का लोन ले रखा है। एक संपत्ति को कई बैंकों में गिरवी रखकर ये धोखाधड़ी की गई है। अर्पण और उसके पिता नरेंद्र प्रजापति पर ईडी की ओर से छापा भी पड़ चुका है। दोनों पर धोखाधड़ी के कई प्रकरण दर्ज हैं।