नौ रत्न और 32 पुतलियों के साथ विराजेंगे उज्जैन के सम्राट

सम्राट विक्रमादित्य की 25 फीट ऊंची प्रतिमा सिंहासन बत्तीसी पर विराजेगी

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Oct 17, 2015
patrika
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उज्जैन. सिंहस्थ अंतर्गत उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य की प्रतिमा रूद्रसागर में स्थापित की जाएगी। टीले पर 10 फीट ऊंचा प्लेटफॉर्म बनेगा। इस पर सम्राट विक्रमादित्य की 25 फीट ऊंची प्रतिमा सिंहासन बत्तीसी पर विराजेगी। प्रतिमा के सामने विक्रमादित्य के नौ रत्नों की मूर्तियां लगेंगी। आसपास 5-5 फीट की 32 पुतलियों की पाषाण प्रतिमा लगेंगी। 32 पुतलियों के साथ उनकी कहानियां भी लिखी जाएंगी। परिक्रमा पथ पर थ्रीडी वॉल बनाकर म्युरल बनाए जाएंगे, जो उज्जयिनी और विक्रमादित्य से संबंधित रहेंगी। टीले तक पहुंचने के लिए नया आर्च ब्रिज बनाया जा रहा है।

कार्य बन सकता है चुनौती
रुद्रसागर विकास कार्य प्रशासन के लिए चुनौती बन सकता है। सिंहस्थ की दृष्टि से क्षेत्र खासा महत्वपूर्ण है और विक्रम टीला सहित अन्य प्रचलित प्रोजेक्ट के चलते वर्तमान में यह अव्यवस्थित है। ऐसे में यदि समय सीमा में प्रोजेक्ट पूरे नहीं हुए तो सिंहस्थ में बड़ी परेशानी खड़ी हो सकती है।

सागर में लगेंगे एक दर्जन से ज्यादा कैम्प
रुद्रसागर में शंकराचार्य के साथ ही करीब एक दर्जन से अधिक साधु-संतों के कैंप लगते हैं। अभी लगभग चार करोड़ रुपए की लागत से रुद्रसागर स्थित विक्रम टीले का विकास किया जा रहा है। प्रोजेक्ट में आर्च ब्रिज के साथ ही पाथ वे, प्रतिमाओं की स्थापना, गैलेरी व अन्य सौंदर्यीकरण कार्य होना है। प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद रुद्रसागर की सफाई करना भी जरूरी होगा। इधर फरवरी से साधु-संतों का आना, आश्रम निर्माण आदि शुरू हो जाएंगे। ऐसे में इससे पूर्व संबंधित साधु-संतों को रुद्रसागर पूरी तरह से तैयार कर देना जरूरी होगा। यदि इसमें देरी होती है तो इसका असर सिंहस्थ व्यवस्थाओं पर पड़ेगा।

65 फीसदी का दावा
नगर निगम की ओर से विक्रम टीले का विकास किया जा रहा है। निगम के उपयंत्री पीयूष भार्गव के अनुसार प्रोजेक्ट का 65 फीसदी कार्य पूरा हो चुका है। सम्राट विक्रमादित्य सहित 32 पुतलियों का निर्माण इंदौर में जारी है। नवंबर से मूर्तियों की स्थापना शुरू हो जाएगी। निगम ने दिसंबर तक कार्य पूरा करने का दावा किया है। हालांकि वर्तमान स्थिति से दिसंबर तक प्रोजेक्ट पूरा होना मुश्किल लग रहा है।
Published on:
17 Oct 2015 01:05 pm