
Ujjain Temples : उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर के भक्तों और श्री शिव प्रेमियों के लिए एक बड़ी और खुशखबरी सामने आई है। महाकाल मंदिर परिसर में स्थित प्राचीन और धार्मिक महत्व के 13 अन्य मंदिरों को एक बार फिर से संवारने (जीर्णोद्धार) की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए करीब सवा 10 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की गई है। परिसर में स्थित विभिन्न प्राचीन मंदिरों के जीर्णोद्धार और संरचनाओं के रखरखाव की जिम्मेदारी उज्जैन विकास प्राधिकरण द्वारा उठाई जा रही है। महाकाल लोक बनने के बाद परिसर में यह सबसे बड़ा बदलाव होगा।
परियोजना के तहत पीएमसी एजेंसी के रूप में सीबीआरआइ और निर्माण एजेंसी के रूप में एएआइसी को नियुक्त किया गया है। इनकी देखरेख में कुल 10.27 करोड़ की लागत से मंदिरों के जीर्णोद्धार और मरम्मत संबंधी कार्य किए जा रहे हैं।
जिन मंदिरों का कायाकल्प होना है, इनमें वृद्धकालेश्वर मंदिर यानी जूना महाकाल, अनादि कल्पेश्वर मंदिर, ओंकारेश्वर मंदिर, कालेश्वर मंदिर, चिंतामणि गणेश मंदिर, मनकामनेश्वर मंदिर, सिद्धेश्वर महादेव मंदिर, गोवर्धन मंदिर, केदारेश्वर मंदिर, भीमाशंकर मंदिर, पाताल महादेव मंदिर, त्र्यंबकेश्वर मंदिर, कोटि सरोवर मंदिर इत्यादि सम्मिलित हैं।
18वीं शताब्दी (मराठा काल- 1731 से 1734 ई.): सन 1234-35 में दिल्ली सल्तनत के शासक इल्तुतमिश द्वारा प्राचीन मंदिर को ध्वस्त किए जाने के लगभग 500 वर्षों बाद, मराठा शासनकाल (1730 के दशक) में इसका सबसे बड़ा और आधुनिक पुनर्निर्माण हुआ।
मंदिर परिसर के शिखरों, कोटि तीर्थ कुंड, प्रांगण के विभिन्न हिस्सों और शिखर पर स्वर्ण कलश/स्वर्ण परत चढ़ाने जैसे सौंदर्यीकरण और जीर्णोद्धार के कार्य लगातार होते रहे हैं।
हालिया समय का सबसे बड़ा विस्तार महाकाल लोक बनने के बाद हुआ। यदि आधुनिक युग के सबसे बड़े विस्तार और कायाकल्प की बात करें, तो अक्टूबर 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 'श्री महाकाल लोक' (कॉरिडोर) के पहले चरण का लोकार्पण किया गया था। इस योजना के तहत मंदिर परिसर का दायरा कई गुना बढ़ गया, जिसमें रुद्रसागर का पुनरुद्धार, मुरल वॉल, शिव स्तंभ और आधुनिक सुविधाओं का निर्माण हुआ। इस बदलाव के होने से महाकाल मंदिर में हर दिन डेढ़ से दो लाख श्रद्धालुओं के आने का क्रम बन गया है। यही नहीं पर्व- त्योहारों पर यह भीड़ और अधिक बढ़ जाती है।