
Mohan Bhagwat : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत मालवा प्रांत के दो दिनी दौरे पर हैं। शुक्रवार को भागवत ने उज्जैन में सेवाज्ञ संस्थानम् द्वारा आयोजित 'युवा धर्म संसद' में युवाओं को संबोधित किया। यहां 25 राज्यों के 1700 से ज्यादा स्टूडेंट उपस्थित थे। शुक्रवार सुबह कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि गीता और रामायण केवल रिटायरमेंट के बाद पढ़ने के ग्रंथ नहीं है। उन्होंने पश्चिमी देशों के रिलिजन को धर्म से अलग बताया। शुक्रवार शाम इंदौर आकर संघ कार्यालय सुदर्शन भवन में रात्रि विश्राम करेंगे और अगले दिन शनिवार को इंदौर से रवाना होंगे।
जानकारी के अनुसार शुक्रवार शाम भागवत सुदर्शन भवन पर चुनिंदा स्वयंसेवकों से मुलाकात करेंगे। संघ के शताब्दी वर्ष पर आयोजित प्रदर्शनी और कार्यशाला को लेकर जानकारी ले सकते हैं।
युवा धर्म संसद को संबोधित करते आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि पश्चिमी देशों के जैसे धर्म को रिलिजन न समझें, यह जीवन का अनुशासन है। उन्होंने कहा कि अपनी भाषा और वास्तविक अर्थ को भूल जाने से धर्म को लेकर भ्रम बढ़ रहा है। मोहन भागवत ने कर्मकांडों को धर्म का एक अंग बताया। उन्होंने कहा कि रिलिजन धर्म नहीं है।
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा- धर्म के पालन से ही जीवन के सभी भौतिक सुखों, इच्छाओं की पूर्ति होती है। यह आपको मोक्ष की ओर ले जाएगा। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने स्पष्ट कहा कि किसी इच्छा पूर्ति के लिए, डर या लालच के कारण या अपनी जान बचाने के लिए भी धर्म का त्याग न करें।
कार्यक्रम में मोहन भागवत ने कहा कि धर्म केवल बुढ़ापे की चीज नहीं है। गीता और रामायण केवल रिटायरमेंट के बाद पढ़ने के ग्रंथ नहीं हैं। उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि अब युवा धर्म के बारे में भी सोच रहे हैं।
नवंबर में संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक प्रस्तावित है। इसमें 450 कार्यकर्ता शामिल होंगे। यह बैठक पहली बार इंदौर में होगी। इसमें डॉ. मोहन भागवत भी शामिल होंगे। बैठक में संघ की नई संरचना पर चर्चा की जाएगी। बताया जा रहा है कि इसके बाद से संघ की नई रचना के आधार पर ही काम होगा।
इससे पहले संघ के उज्जैन महानगर एवं विभाग के दायित्ववान कार्यकर्ताओं, शाखाओं के मुख्य शिक्षक व कार्यवाह तथा अनुसांगिक संगठनों के कार्यकर्ताओं चयनित गुरुवार को बैठक आयोजित हुई। बैठक को संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने संबोधित किया। करीब 40 मिनट के संवाद में उन्होंने संगठन को मजबूत करने, शाखाओं के विस्तार और समाज में निरंतर संपर्क बढ़ाने पर जोर दिया।
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि स्वयंसेवक अपनी-अपनी शाखाओं को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दें। संघ कार्य में किसी भी तरह की चमक-दमक से दूर रहकर संगठन के मूल उद्देश्य और कार्यपद्धति के अनुरूप निरंतर सक्रिय रहना चाहिए। उन्होंने स्वयंसेवकों को सत्ता के मोह और प्रलोभन से दूर रहने की बात कहते हुए संगठन की मजबूती को प्राथमिकता देने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि शाखाएं संघ कार्य की आधार इकाई हैं। इनके माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों से निरंतर संपर्क और संवाद बढ़ाते हुए संगठन के कार्य का विस्तार किया जाना चाहिए।