
उज्जैन. राजनीति का पर्याय जनता की दुख-तकलीफों को दूर कर देश के विकास के नए पैमाने गढऩा है। वर्तमान राजनीति कलुषित हो गई है। राजनीतिक पार्टियां अब वोट बैंक की राजनीति कर रही है, चुने हुए लोग जनता नहीं स्वयं के हित को सर्वोपरि समझते हैं। राजनीति की इस दुर्दशा को स्वच्छ छवि के लोग ही आगे आकर दूर कर सकते हैं। देश की राजनीति का दुर्भाग्य है कि बुद्धिजीवी और साफ छवि के लोग इससे दूरी बनाकर रखते हंै, क्योंकि उन्हें डर लगता है कहीं राजनीति की काजल की कोठरी में वे दागदार नहीं हो जाए। इससे कब तक डर कर रहेंगे...बदलाव का समय है, अगर अब भी समाज के पथप्रदर्शक आगे नहीं आए तो गंदी राजनीति देश को ओर गर्त में ले जाएगी।
यह विचार गुरुवार को शहर के प्रबुद्ध वर्ग के लोगों ने पत्रिका में टॉक शो में व्यक्त किए। इसमें पत्रिका के चेंजमेकर्स महाअभियान की प्रशंसा करते हुए कहा कि आखिर किसी ने राजनीति का स्वरूप बदलने का बीड़ा तो उठाया है। आज जो राजनीति हो रही है या जो राजनीतिक दल है वे आम जनता की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर रहे हंै। वोट के लिए बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन सत्ता में आते ही बदल जाते हैं। अगर राजनीति में समाज से जुड़े, उनकी समस्या को जानने वाले साफ छवि के लोग आगे आते हैं तो इससे राजनीति का कायाकल्प होना निश्चित है। पत्रिका के इस महाअभियान का आम जनता पर तो असर पड़ेगा ही वे लोग भी आगे आएंगे, जो अब तक राजनीति से दूरी बनाकर रखते हैं।
यह बोले प्रबुद्ध वर्ग
राजनीति में अब महिलाओं को आगे आना होगा। महिलाओं को जिम्मेदारी मिलती है तो वे बखूबी उसे निभाती है। राजनीतिक पार्टियां इस ओर ध्यान नहीं देती। महिलाओं के बराबरी का हक देने की सब बात कहते हैं लेकिन वास्तवकिता में इस पर अमल नहीं होता। अब समय बदल रहा है पार्टियों को भी बदलना होगा। नेताओं को लोगों की भावनाओं को समझना होगा, अगर ऐसा ही चलता रहा तो लोगों की नाराजगी झेलना पड़ेगी। पत्रिका को आभार कि उसने समाज में नई चेतना जगाने की पहल की है। -पुष्पा पाटीदार, प्रांतीय अध्यक्ष, मप्र महिला पाटीदार संघ
विनोद मिल १९९१ में बंद हुआ, ६७ करोड़ रुपए मजदूरों के बकाया है, आज तक यह राशि नहीं मिल पाई। इसके पीछे वजह है सरकार में मजदूरों की नुमांइदगी ठीक नहीं होना। केंद्र सरकार ने तीन हजार रुपए पेंशन देने का वादा किया था लेकिन आज तक लागू नहीं हो पाया। राजनीतिक दल सत्ता पाने के लिए झूठे वादे और सपने दिखाते हैं। अब समय आ गया है कि राजनीति में क्षेत्र के विशेष के लोग जाएं, जो उससे जुड़े लोगों का दर्द समझ सके। पत्रिका का चेंजमेकर महाअभियान इसमें बड़ी भूमिका निभा सकता है। - ओमप्रकाश भदौरिया, अध्यक्ष, इंटक मजदूर संघ
आज की राजनीति ऐसी हो गई है कि राजनीतिज्ञ लोगों के लिए कोई कानून-प्रावधान नहीं है। बात जब जनता की आती है तो यही लोग कानूनी अड़चनें डालने लगते हैं। पार्टियों को अब जनता का दुख दर्द समझने वाला नहीं बल्की गुलाम नेता चाहिए। गंदी होती इस राजनीति को अच्छे लोग आकर ही सुधार सकते हैं। - संतोष सुनहरे, उपाध्यक्ष, इंटक मजदूर संघ
राजनीति को सुधारना है तो इसमें पढ़े-लिखे लोगों को आगे आना होगा। शैक्षणिक योग्यता का मापदंड रखना होगा। पत्रिका ने जिस तरह राजनीति में आने के लिए अच्छे लोगों को जागरूक किया वह काबिले तारीफ है। निसंदेह इससे राजनीति में बदलाव दिखेगा। - बलवीरसिंह पंवार, शहर अध्यक्ष, अखिल भारतीय क्षत्रि महासभा
राजनीति का हश्र क्या हो गया है इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि संतों को राज्यमंत्री का दर्जा दे दिया गया। राजनीतिक पार्टियों के चाल, चलन और चेहरे सब गंदे हो गए हैं। कभी राजनीति इसलिए की जाती थी कि लोगों का भला करना है, लेकिन अपने भले की राजनीति हो रही है। अब जागरूक होने का समय है, नोटा है या फिर किसी काबिल व्यक्ति को राजनीति में भेजने के बारे में गंभीर चिंतन करना चाहिए। - बलविंदरसिंह नील, व्यवसायी
राजनीति अब वोट बैंक की हो गई है। पार्टियों को लोगों की तकलीफ, देश विकास से मतलब नहीं उन्हें सिर्फ हित साधना होता है। सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एक्ट की विसंगति को दूर की, लेकिन वोट बैंक के चलते सरकार सुप्रीम कोर्ट चली गई। राजनीति की यह दशा तभी सुधर सकती है जब बुद्धिजीवी वर्ग आगे आए। - अंगदसिंह भदौरिया, राष्ट्रीय संगठन मंत्री, अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा
आज धनबल और बाहुबल के जरिए चुनाव लड़े जा रहे हैं। अच्छे लोग यह सोचकर नहीं आते कि उनका चरित्र पर आक्षेप लगेगा। सज्जन लोगों को यही पीड़ा उन्हें राजनीति से दूर करती है। हमें दिल्ली में हुए तीसरी पार्टी के प्रयोग के बारे में भी सोचना चाहिए कि वहां लोगों के भारी बहुमत के बाद भी मकसद हासिल नहीं हो पाया। पत्रिका ने चेंजमेकर महाअभियान शुरू किया उससे निश्चित बदलाव आएग। -आशीष उपाध्याय, अभिभाषक
पत्रिका ने अब तक जितनी मुहिम चलाई है वे सब सफल हुई हैं। अब चेंजमेकर अभियान भी सफल होगा। देश में राजनीति की इस दिशा के पीछे लोगों में ज्ञान की कमी भी एक कारण है। सरकार के काम का सही आकलन नहीं होता। निश्चित तौर पर अब राजनीति में स्वच्छ छवि के लोग आना चाहिए, जिससे बदलाव दिखे।
- राजेश अग्रवाल , संभागीय अध्यक्ष, वैश्य महासम्मेलन
राजनीति में योग्यता का मापदंड रखना अब जरूरी हो गया है। जब तक उच्च शिक्षित लोग राजनीति में नहीं आएंगे व्यवस्था नहीं सुधरेगी। पत्रिका को इस बात के लिए धन्यवाद कि राजनीति में बदलाव का प्रयास शुरू किया है। इस अभियान से लोगों में जागरुकता बढ़ेगी और लोग आगे तो आएंगे ही ऐसे लोगों को भी समर्थन करेंगे जो साफ छवि के हैं। - उषा पंवार, अध्यक्ष, अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा महिला विंग
यह निकला निष्कर्ष
- राजनीति अब गंदी हो चुकी है, इस पर सब एकमत हैं। अब बदलाव जरूरी है।
- जनता की पीड़ा सुनने के बजाय उसके नाम पर पार्टियां राजनीति करती है। देश में आंदोलन इसी का परिणाम है।
- पार्टियां अपने मूल उद्देश्य से भटक गई हैं। एक ही मकसद है कैसे भी सत्ता हासिल करना है।
- राजनीति की इस दशा के पीछे समाज के अच्छे लोगों का आगे नहीं आना है। अब गुंडे-बदमाश भीड़ का नेतृत्व करते हैं।
- लोगों को अब पार्टियों की बजाय ऐसे लोगों को अपना प्रतिनिधित्व सौंपना चाहिए जो समाज से जुड़े हैं और बेदाग हैं।