उज्जैन

उज्जैन में हटेगी 100 साल पुरानी मस्जिद, हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत, सिंहस्थ के लिए होना है सड़क चौड़ीकरण

Ujjain Shahi Masjid Demolition: सिंहस्थ-2028 के मद्देनजर उज्जैन शहर में सड़क चौड़ीकरण (Road Widening)का काम चल रहा है। इसी को लेकर 100 साल पुरानी शाही मस्जिद का हिस्सा हटाया जाएगा। हाईकोर्ट ने नहीं दी राहत।
2 min read
• •
Updated: 10 Sep 2026, 10:18 AM IST
simhastha road widening ujjain shahi masjid demolition high court
Ujjain Shahi Masjid Demolition: सिंहस्थ के लिए सड़क चौड़ीकरण करने के लिए हटाई जाएगी 100 साल पुरानी मस्जिद (फोटो सोर्स- ANI)

Simhastha Road Widening: 2028 में में होने वाले सिंहस्थ (Simhastha 2028) की तैयारियां तेजी से जारी हैं। इसके चलते उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण का काम भी तेजी से किया जा रहा है। इसमें करीब 100 साल पुरानी शाही मस्जिद का भी हिस्सा (Ujjain Shahi Masjid Demolition) टूटना है। इसको लेकर इंदौर हाईकोर्ट (Indore High Court) में दो याचिकाएं दायर हुई थीं। इन दोनों ही याचिकाओं पर बुधवार को जस्टिस संदीप एन. भट्ट की कोर्ट में सुनवाई हुई। जहां दोनों ही याचिकाएं खारिज कर दी गईं। हालांकि, कोर्ट का विस्तृत आदेश अभी जारी नहीं हुआ है। याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया है कि आदेश मिलने के बाद वे इसके खिलाफ अपील करेंगे।

मस्जिद वक्फ पंच मोचियान अध्यक्ष ने लगाई थी याचिका

उज्जैन के गोपाल मंदिर सड़क चौड़ीकरण का काम किया जा रहा है। इस सड़क के लिए उज्जैन नगर निगम मार्ग में आने वाले निर्माणों को हटाने की कार्रवाई कर रहा है। इसके चलते शाही मस्जिद को हटाने के लिए नगर निगम के भवन अधिकारी ने नोटिस जारी किया था, जिसके खिलाफ मस्जिद प्रबंधन और अन्य लोगों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। एक याचिका शाही मस्जिद वक्फ पंचायत मोचियान और शाही मस्जिद इंतजामिया कमेटी की ओर से दायर की गई थी। इसमें मप्र शासन, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के संयुक्त संचालक, उज्जैन नगर निगम, भवन अधिकारी और कलेक्टर को पक्षकार बनाया गया था। दूसरी याचिका शाही मस्जिद वक्फ पंच मोचियान के अध्यक्ष अरशान हुसैन की ओर से दाखिल की गई। इसमें मप्र शासन, नगर निगम और मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड को पक्षकार बनाया गया था।

शाही मस्जिद 100 वर्ष पुरानी, ऐतिहासिक दस्तावेज उपलब्ध

याचिकाओं में मस्जिद कमेटी ने उज्जैन नगर निगम के नोटिस को अपूर्ण, अस्पष्ट और अवैधानिक बताते हुए आपत्ति दर्ज कराई थी। प्रबंधन का दावा है कि शाही मस्जिद 100 वर्ष से अधिक पुरानी है और इससे जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेज उपलब्ध हैं। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, 17 मार्च 1925 को सिंधिया राजघराने के चेयरमैन, टाउन इम्पूवमेंट ट्रस्ट और ग्वालियर सरकार लश्कर की ओर से शहर काजी को पत्र जारी किया गया था। इसमें भूमि अधिग्रहण के बाद मस्जिद के शेष हिस्से को यथावत रखने का उल्लेख था। इसके अलावा 13 सितंबर 1985 के मप्र शासन के राजपत्र में भी मस्जिद और उसकी पैमाइश का उल्लेख होने का दावा किया गया है।

वर्तमान में सड़क करीब 40 फीट चौड़ी

प्रबंधन का यह भी कहना है कि वर्ष 1975 में यातायात सुगम बनाने के लिए मस्जिद की ओर से स्वेच्छा से भूमि दी गई थी। वर्तमान में सड़क करीब 40 फीट चौड़ी है और आवागमन में कोई बड़ी बाधा नहीं है। इसलिए धार्मिक स्थल को हटाने की कार्रवाई को गलत बताया था। हालांकि, कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं ओर सरकार का पक्ष सुनने के बाद याचिकाओं को खारिज कर दिया है। याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता सैय्यद अश्हार अली वारसी ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि हम विस्तृत आदेश का इंतजार कर रहे हैं। कोर्ट के आदेश को देखने के बाद उसके खिलाफ हम अपील दायर करेंगे।

Updated on:
10 Sep 2026, 10:18 AM IST
Published on: