उज्जैन

महाकाल मंदिर प्रशासक ने झाड़ू लगाकर दिए ये अव्यवस्थाएं दूर करने के संकेत

महाकाल में प्रभाव-दबाव की चुनौतियों के बीच आठवें प्रशासक ने ग्रहण किया पदभार, पहले भगवान महाकाल का पूजन, फिर मंदिर में की सेवा
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Updated: 13 May 2018, 1:25 AM IST
patrika
महाकाल में प्रभाव-दबाव की चुनौतियों के बीच आठवें प्रशासक ने ग्रहण किया पदभार, पहले भगवान महाकाल का पूजन, फिर मंदिर में की सेवा

उज्जैन. उज्जैन विकास प्राधिकरण के सीइओ अभिषक दुवे ने शनिवार को महाकाल मंदिर प्रबंध समिति के प्रशासक का पदभार भी ग्रहण कर लिया। उन्होंने पहले भगवान महाकाल का पूजन-अर्चन किया, फिर नंदीगृह में झाडू लगाकर सेवा कार्य भी किया।
महाकाल मंदिर में करीब ढाई वर्ष से स्थायी प्रशासक की दकरार है। शासन-प्रशासन लम्बे समय के मंदिर को स्थायी प्रशासक देने में नाकामयाब है। हाल के वर्ष में देखें तो जयंत जोशी और आरपी तिवारी के बाद ६ प्रशासक नियुक्त किए गए हैं, लेकिन कई कारणों के चलते कोई भी प्रशासक ८-१० माह से अधिक पद पर नहीं रहा है। मंदिर में कुछ समय से दर्शन को लेकर दवाब- प्रभाव अधिक बढ़ गया है। इसके साथ कई सेवक संबंधों के हवाले से मंदिर में सेवारत हैं। इनके संबंध मंदिर की व्यवस्थाओं पर भारी पड़ते हैं। मंदिर की व्यवस्था और श्रद्धालुओं को दर्शन की बेहतर सुविधाएं देने के बीच प्रशासक के सामने प्रभाव, दबाव और संबंधों से निपटना भी एक बड़ी चुनौती है। बहरहाल कलेक्टर एवं महाकाल मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष मनीषसिंह ने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट सीइओ अवधेश शर्मा को मंदिर प्रबंध समिति के प्रशासक पद से मुक्त कर यूडीए सीइओ अभिषेक दुवे को उनके मुख्य कार्य के साथ-साथ महाकाल मंदिर प्रबंध समिति प्रशासक की जिम्मेदारी दी है। दुवे ने दोपहर करीब २ बजे महाकाल मंदिर पहुंचकर शर्मा से प्रशासक का पद ग्रहण किया। इसके पहले दुवे ने महाकालेश्वर भगवान पूजन-अभिषेक किया। स्वच्छता का संदेश देने के साथ मंदिर के सेवकों को सतत् कार्य करने की प्रेरणा देने के उद्देश्य से मंदिर के नंदीहॉल में झाडू लगाई। इसके बाद मंदिर की विभिन्न शाखाओं के प्रभारियों से औपचारिक भेंट परिचय प्राप्त किया। इस अवसर पर मंदिर के सहायक प्रशासनिक अधिकारी दिलीप गरुड़, एसपी दीक्षित, आरके तिवारी आदि उपस्थित थे।
सकारात्मक नजरिए से योजना बनाकर कार्य करेंगे
पदभार ग्रहण करने के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए प्रशासक दुवे ने कहा कि महाकाल से बढ़कर कोई नहीं है। मंदिर के अधिकारी, पुजारी-पुरोहितो, सेवकों और अन्य संबंधित इकाइयों को साथ लेकर सकारात्क नजरिए से योजना बनाकर कार्य करेंगे। आस्था और विश्वास के साथ महाकाल दर्शन के लिए आने वाले भक्तों को बेहतर सुविधाएं दी जाएंगी। मंदिर की सभी शाखाओं के प्रभारियों के साथ कार्यों, गतिविधियों की समीक्षा कर आगे बढ़ेंगे।

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