
उज्जैन. चुनाव में हर प्रत्याशी के अपने दावे और वादे हैं। अब जो प्रत्याशी जीते वह शहर के विकास का संकल्प लें। यह कहना है शहर के अभिभाषक वर्ग का। प्रत्याशी अभिभाषकों के लिए एडवोकेट प्रोटक्शन एक्ट लागू करवाए। शहर विकास के लिए उद्योगों की स्थापना हो ताकि युवाओं को रोजगार मिल सके। धार्मिक पर्यटन नगरी के रूप में सुविधाएं जुटाए और शिप्रा नदी को प्रवाहमान बनाने के प्रयास करे। जनप्रतिनिधि व्यक्तिगत राजनीति से ऊपर उठकर समाज व शहरहित के लिए काम करे।
एक्ट की मांग पूरी हो
अभिभाषकों की सालों से एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट की मांग अब तक पूरी नहीं हुई है। अन्य अधिकारियों की सुरक्षा के लिए एक्ट है लेकिन अभिभाषक जो सबसे रिस्की काम करते हैं उसके लिए सुरक्षा के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। मैं चाहता हूं जो भी प्रत्याशी है वह इस एक्ट को लागू करने का कमिटमेंट करें। हमारे शहर में पानी है, जमीन है बावजूद पिछले सालों में उद्योग स्थापित नहीं हो सके।
- प्रमोद चौबे, अध्यक्ष, अभिभाषक संघ
बेरोजगारी बड़ी समस्या
शहर में एक-एक कर सारे उद्योग बंद हो गए। २५ हजार से ज्यादा लोग बेरोजगार हो गए। एक तरह से हमारा शहर उद्योग विहिन हो गया है। एक तरफ कहा जाता है कि शहर में पर्यटन की असीम संभावना है लेकिन इसके लिए विशेष प्रयास नहीं हुए हैं। शिप्रा की हालत खराब है। जो भी प्रत्याशी जीते, वह संकल्प ले कि शिप्रा को प्रवाहमान करवाएगा और बड़े उद्योग स्थापित करेगा।
- ठा. हरदयालसिंह, वरिष्ठ अभिभाषक
महंगाई कम हो
बेरोजगारी एक बड़ी समस्या है, जो लगातार बढ़ रही है। ज्यादातर युवाओं को इस समस्या का सामना करना पड़ रहा है और इसके असर से पूरा परिवार प्रभावित होता है। इसके साथ ही महिलाओं की सुरक्षा, वास्तविक किसानों की आर्थिक स्थिति व बढ़ती महंगाई भी प्रमुख मुद्दे हैं। किसी की भी सरकार बने, इन मुद्दों पर फोकस करना जरूरी होगा, ताकि राहत मिले।
- अश्विन चौधरी, युवा अभिभाषक
उद्योग लगना चाहिए
शहर में अच्छी सड़कें बना दें, गार्डन विकसित कर दें लेकिन रोजगार मुहैया नहीं कर पाए तो ऐसा विकास किसी काम का नहीं। जो भी प्रत्याशी जीते वह शहर में उद्योग लगाने का काम प्राथमिकता से करे। आज जो अपराध बढ़ रहे हैं उसकी वजह भी यही है कि युवाओं के पास रोजगार नहीं है। वहीं मेरा मानना है कि वोट बैंक की राजनीति न हो। हर वर्ग, हर समाज को ध्यान में रखकर विकास का खांका खीचा जाए।
- अपेक्षा शुक्ला, अभिभाषक
आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति हो रही
चुनाव में मूल रूप से विकास, रोजगार, कुपोषण, शिक्षा, कानून व्यवस्था, महिला सशक्तिकरण, भ्रष्टाचार, किसानों की समस्या, छात्रों की समस्याओं के मुद्दे होना चाहिए किन्तु सभी प्रमुख दल इन्हें छोड़कर सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति कर रहे हैं। इसी कारण आम जनता का राजनीति और नेताओं से मोहभंग हुआ है। इसके कारण नोटा का प्रचलन बढ़ा है और आने वाले समय में जनता और ज्यादा नोटा की तरफ अग्रसर होगी।
- यशवंत अग्निहोत्री, वरिष्ठ अभिभाषक
शिप्रा शुद्धिकरण की कोई बात नहीं हो रही
बीजेपी हो कांग्रेस दोनों प्रमुख दलों के नेताओं द्वारा राष्ट्रीय मुद्दों पर भाषण दिए जा रहे हैं, स्थानीय मुद्दे गायब हैं। महंगाई, भ्रष्टाचार व बेरोजगारी जैसे गरम मुद्दे राजनीतिक दलों के एजेंडे में नहीं हैं। शिप्रा नदी उज्जैन वासियो की आस्था की प्रतीक है लेकिन ये शुद्ध नहीं हो पा रही। उज्जैन में उद्योगों का अभाव होने से युवाओं को दूसरे शहर में काम की तलाश में पलायन करना पड़ता है।
- आशीष उपाध्याय, वरिष्ठ अभिभाषक