Vikas Dubey Kanpur: देशभर में सनसनी फैलाने वाले विकास दुबे की उज्जैन में गिरफ्तारी और उसके एनकाउंटर को ठीक पांच साल पूरे हो गए हैं। लेकिन जिस साहसी फूल विक्रेता और सुरक्षाकर्मियों ने इस खतरनाक गैंगस्टर को उज्जैन के महाकाल मंदिर परिसर से पकड़वाने में अहम भूमिका निभाई थी, सरकार उन्हें 5 लाख रुपए की इनामी राशि देना भूल गई।
Vikas Dubey Kanpur: देशभर में सनसनी फैलाने वाले विकास दुबे की उज्जैन में गिरफ्तारी और उसके एनकाउंटर को ठीक पांच साल पूरे हो गए हैं। लेकिन जिस साहसी फूल विक्रेता और सुरक्षाकर्मियों ने इस खतरनाक गैंगस्टर को उज्जैन के महाकाल मंदिर परिसर से पकड़वाने में अहम भूमिका निभाई थी, उन्हें उत्तरप्रदेश पुलिस की ओर से घोषित 5 लाख रुपए का इनाम अब तक नहीं मिला है। यह वही इनाम है, जिसकी घोषणा यूपी पुलिस ने की थी और इस पूरे मामले में उज्जैन पुलिस ने जांच रिपोर्ट तैयार कर, पकड़वाने वाले लोगों के नाम नंबर के साथ फाइल यूपी पुलिस को भेजी थी।
9 जुलाई 2020 को विकास दुबे ने देशभर की सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देते हुए महाकाल मंदिर की शरण ली। लेकिन यहां फूल बेचने वाले साहसी सुरेश कहार ने उसकी पहचान कर सबसे पहले मंदिर समिति के सुरक्षाकर्मियों को सूचना दी। सुरक्षा गार्डों ने तत्परता दिखाते हुए परिसर में तैनात पुलिस बल को सतर्क किया और आखिरकार उज्जैन पुलिस ने दुबे(Vikas Dubey Kanpur) को धरदबोचा। यह गिरफ्तारी कानून-व्यवस्था की बड़ी सफलता मानी गई, जिसके बाद यूपी पुलिस ने मप्र पुलिस से इनाम के योग्य लोगों की सूची मांगी। इस पर तत्कालीन एसपी सत्येन्द्र शुक्ल के निर्देश पर एक विशेष जांच दल गठित किया गया।
रिपोर्ट में इनाम के लिए सात लोगों के नाम तय किए गए। इनमें फूल विक्रेता सुरेश कहार, सिक्योरिटी गार्ड राहुल शर्मा, रवि योगी, लखन यादव और अर्जुन आंजना के साथ महाकाल चौकी के दो पुलिसकर्मी शामिल हैं। यह रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय के माध्यम से उत्तरप्रदेश पुलिस को भेजी थी लेकिन पांच साल गुजर गए, न इनाम मिला, न कोई जवाब आया।
हार-फूल दुकान संचालक सुरेश कहार की पीड़ा उनके शब्दों में झलकती है। उनका कहना है, जान की परवाह किए बगैर उसे पकड़वाया जो यूपी के 9 पुलिसकर्मियों की हत्या कर उज्जैन आया था। इनाम के अन्य दावेदारों में गहरा रोष और निराशा है। सुरक्षा गार्ड ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, हमने जो किया, वह ड्यूटी से बढ़कर था। लेकिन अब लगता है, ईमानदारी और बहादुरी का कोई मोल नहीं रहा। इसके अलावा एक पुलिसकर्मी तो यह सवाल खड़े किए हैं कि क्या अपराधियों को पकड़वाने में मदद करने वाले आम नागरिकों को ऐसे ही नजरअंदाज किया जाएगा। क्या इनाम केवल दिखावे के लिए घोषित किए जाते हैं।