
Shiv Mahapuran story by Pandit Pradeep Mishra in Unnao: उन्नाव में सीहोर वाले पंडित प्रदीप मिश्रा की शिव महापुराण कथा चल रही है आज चौथे दिन उन्होंने शिव की महिमा को बताया। उन्होंने उपस्थित श्रोताओं से पूछा कि शिव जी के मंदिर में कछुए का क्या काम है इसका जवाब भी उन्होंने स्वयं दिया बोले कि जब कोई भक्त शिवलिंग पर जल चढ़ाने जाता है और जल चढ़ाने के बाद ज्योति प्रज्वलित नहीं करता है तो कछुआ की आंखें हमारे मन के दीप को शिव के सामने प्रकट कर देता है। आज शिव पुराण शिव महापुराण कथा सुनने के लिए लाखों की संख्या में भीड़ उमड़ी।
उत्तर प्रदेश के उन्नाव में पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि 12 वर्ष के वनवास और 1 वर्ष के अज्ञातवास होने पर अर्जुन ने श्री कृष्ण से पूछा कि जब हस्तिनापुर का राजयोग दुर्योधन का है तो फिर युद्ध क्यों? इस पर श्री कृष्ण ने कहा कि 12 का वनवास और एक फर्श का अज्ञातवास के दौरान शिव जी की आराधना करो वापस में आने पर पता चल जाएगा। श्री कृष्ण की सलाह पर अर्जुन और भीम ने शिव जी की आराधना की। इस दौरान उन्होंने कई शिवलिंग की स्थापना की।
पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि धृतराष्ट्र ने दरबार में श्री कृष्णा और अन्य की मौजूदगी में ब्राह्मण से पूछा कि दुर्योधन का भाग्य चक्र क्या है? इस पर ब्राह्मण ने कहा दुर्योधन हस्तिनापुर का राजा बनेगा। लेकिन महाभारत युद्ध के दौरान दुर्योधन की सेना को काफी नुकसान हुआ। भाइयों की भी मौत हो रही थी। युद्ध के दौरान धृतराष्ट्र ने ब्राह्मण को बुलाकर कई बार दुर्योधन के भाग्य चक्र के विषय में पूछा। हर बार ब्राह्मण ने यही कहा दुर्योधन के भाग्य में राजयोग गए। हस्तिनापुर का राजा बनेगा।
पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि युद्ध के अंत में धृतराष्ट्र के इसी सवाल पर ब्राह्मण ने कहा कि दुर्योधन के भाग्य चक्र में राजयोग लिखा है। लेकिन पांडव ने 12 वर्ष के वनवास और 1 साल के अज्ञातवास के दौरान शिव जी की आराधना की है। जिसके कारण दुर्योधन का भाग्य चक्र भी बदल गया और पांडवों की जीत हो रही है। पांडवों के साथ भोले बाबा की शक्ति अदृश्य शक्ति साथ चल रही है। शिवाजी भाग्य चक्र को बदलते हैं।
पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि ब्रह्मा, विष्णु और महेश में कोई अंतर नहीं है, तीनों एक ही है। इसका उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि शिव जी के मंदिर में घड़े के नीचे तीन स्तंभ होते हैं जो ब्रह्मा विष्णु और महेश का प्रतीक है। घड़े से बूंद बूंद जल शिवाजी पर टपकता है। इस मौके पर उन्होंने आरती सुनाई। जिसमें बोले- "ब्रम्हा, विष्णु, सदाशिव जानत अविवेका, प्रणवाक्षर के मध्ये ये तीनों एका। ॐ जय शिव ओंकारा, प्रभु हर शिव ओंकारा।" आज शिव महापुराण के चौथे दिन लाखों की संख्या में भीड़ उमड़ी। पंडाल के अतिरिक्त आसपास का क्षेत्र खचाखच भरा हुआ था।