
Pandit Pradeep Mishra Shiv Purana Mahapuran Story: उन्नाव में शिव महापुराण कथा में पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि हम उत्तर प्रदेश वाले हैं, हम किसी को छेड़ते नहीं है और हमें जो छेड़ता है उसे हम छोड़ते नहीं है। हम गंगा को उत्तर प्रदेश में सदा के लिए ला सकते हैं तो भोले बाबा को भी कैलाश पर्वत से ला सकते हैं। पंडित प्रदीप मिश्रा बीघापुर के गौरी में शिव महापुराण कथा का आयोजन किया गया है। 30 अक्टूबर से शुरू हुई साथ दिवसीय श्री शिव महापुराण कथा का समापन 5 नवंबर को होगा। 5 नवंबर का शिव महापुराण कथा सुबह 8 बजे से शुरू होगी।
उत्तर प्रदेश के उन्नाव में प्रदीप मिश्रा ने कहा कि शिव महापुराण कथा के केवल 2 दिन की बचे हैं। कल छठा दिन है जो कथा की शिवरात्रि का दिन होता है। इस मौके पर भक्तों का सैलाब उमड़ता है। कल का दिन खास है। इसलिए सौ-डेढ़ सौ किलोमीटर की दूरी पर रहने वाले सभी भक्त शिव महापुराण कथा स्थल पर अवश्य आए। यहां कल शिवरात्रि की लीला का दर्शन अवश्य करें।
पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि कथा स्थल पर रहने वाले भक्त रात भर नाम जाप करते हैं, कीर्तन करते हैं, उनके लीला का दर्शन करें। कल छठे दिन की कथा में भक्तों की भीड़ ज्यादा रहेगी। यहां की रज पूर्वजों तक का उद्धार करती है। यही शिव तत्व है। यहां बेलपत्र, रुद्राक्ष या प्रसाद का वितरण नहीं होता है। शिव महापुराण में आने वाले भोले के गणों की व्यवस्था शिवजी ही करते हैं जजमान नहीं कर सकता है। इतनी ज्यादा भीड़ होती है।
पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि लोग कहेंगे कि इतनी भीड़ है, वहां क्यों जा रहे हो, कीचड़ भी है। वह क्या मिलेगा? ऐसे लोगों को यही जवाब देना है कि मेरी जो मर्जी होगी मैं वहीं करूंगा। मैं तेरी क्यों सुनो मैं अपने दिल की सुनूंगा। दरअसल बीते दिनों हुई बारिश के कारण कथा स्थल पर कीचड़ हो गया था। जिला प्रशासन और आयोजक ने बालू डलवा कर कीचड़ को खत्म करवा दिया। इस पर पंडित प्रदीप मिश्रा ने जिला प्रशासन और अरुण सिंह की तारीफ की।
पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि काशी में पहले गंगा आती और जाती थी। लेकिन काशी में भक्तों का भाव इतना प्रबल हो गया कि भगवान शिव से कहकर गंगा को काशी में सदा-सदा के लिए विराजमान कर लिया। इसलिए उत्तर प्रदेश वाले छाती ठोक कर कहते हैं कि हम उत्तर प्रदेश वाले हैं। जब गंगा को ला सकते हैं तो कैलाश से महादेव को भी ला सकते हैं। हम किसी को छेड़ते नहीं है लेकिन हमें कोई छेड़ता है तो हम छोड़ते नहीं है।
पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि भगवान शिव त्रिकालदर्शी, औघड़ दानी, अविनाशी है। शिव के मंदिर में एक लोटा जल चढ़ाने जाते हो तो यह समझ लेना की दुख की घड़ी में भोले बाबा तुम्हारे दरवाजे खड़े मिलेंगे। आपके अकाउंट में कितने पैसे, कितने बंगले हैं यह आपको मालूम है। लेकिन कितनी सांसें बची है यह नहीं मालूम है। आखिरी समय में कुछ भी काम नहीं आता है। केवल एक लोटा जल ही काम आएगा। कथा के अंतिम दिन 5 नवंबर को सुबह 8 बजे कथा शुरू होगी, जो 11 बजे तक चलेगी।