उन्नाव

उन्‍नाव एड्स मामला : बदनामी के डर से भले चंगे लोग भी छोड़ रहे हैं शहर

पूर्व स्वास्थ्य राज्यमंत्री ने बांगरमऊ सीएचसी में जांच केंद्र बनाए जाने की मांग कि
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Updated: 19 Feb 2018, 5:20 PM IST
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उन्नाव. बांगरमऊ क्षेत्र में एचआईवी पॉजिटिव मामले में अधिकांश श्रमिक खेतिहर मजदूर हैं। बेहद गरीब तबके के ये लोग कानपुर दवा लेने जाने में भी असमर्थ है। उनके पास इतने पैसे नहीं हैं। वह कानपुर दवा लेने जा सके। इस विषय में बताया गया है कि सो रुपए प्रति पेशेंट उनको आने जाने का किराया दिया जाएगा। कब मिलेगा यह तो अलग बात है, लेकिन 9 साल की बच्ची बिना अटेंडेंट के नहीं जा सकती है। यही स्थिति जो 70 - 75 साल की बुजुर्ग हैं उनके साथ सहायक जरूरी है। इस संबंध में बातचीत करने पर बांगरमऊ के पूर्व विधायक व समाजवादी सरकार में पूर्व स्वास्थ्य राज्यमंत्री रह चुके अशोक कुमार सिंह बेबी ने एचआईवी पॉजिटिव मामले में स्वास्थ्य विभाग पर ठीकरा फोड़ा। उन्होंने कहा कि जब एक मरीज स्वास्थ्य केंद्र में उपचार के लिए जाता है तो उसे डॉक्टर नहीं मिलता है। फिर उसके सामने विकल्प क्या रहता है। झोलाछाप के अलावा उसके सामने कोई दूसरा रास्ता नहीं बचता है। ऐसे में स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर की उपस्थिति और उनकी कार्यप्रणाली को सुधारने की आवश्यकता है।

झोलाछाप डॉक्टर से उपचार कराना ग्रामीणों की मजबूरी

बांगरमऊ के प्रेम गंज निवासी ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि क्षेत्र के ज्यादातर मरीज झोलाछाप डॉक्टरों की शरण में पहुंचकर ही अपना उपचार कराते हैं। एक जगह फायदा ना होने की स्थिति में वह दूसरे झोलाछाप डॉक्टरों के पास चले जाते हैं। वे स्वास्थ्य विभाग से पूरी तरह निराश हो चुके हैं। ऐसे में परमानेंट कैंप लगाने की आवश्यकता है। जो कुछ दिनों तक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में संचालित हो और जांच की पूरी व्यवस्था हो। इसके साथ ही प्रभावित लोगों को जागरूक करते हुए इस बात का विश्वास दिलाया जाए कि उनकी पहचान गुप्त रखी जाएगी।

चर्चा इस बात की भी है कि यदि गंभीरता से जांच कराई जाए तो जो संख्या और भी अधिक हो सकती है। जो काफी काफी भयावह आ सकती है। झोलाछाप डॉक्टर बांगरमऊ रेलवे स्टेशन के पास स्थित गला समिति धर्मशाला के नीचे स्थित दुकान में अपना नर्सिंग होम चलाता था। जो पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुका है।

ग्रामीणों ने बताया कि आज प्रेम गंज में लगभग 200 परिवार रहते हैं। जहां आज कोई फेरी लगाने नहीं जा रहा है। उन्होंने बताया कि यहां पर अधिकांश लोग बटाईदार और श्रमिक का काम करते हैं। इसके साथ ही प्रेम गंज के आसपास के मोहल्लों की भी जांच होनी जरूरी है जिस बात की शिकायत प्रेम गंज के दलित परिवार के लोग करते हैं कि केवल प्रेम गंज को ही क्यों बदनाम किया जा रहा है। क्या यह बीमारी दलित बस्ती में ही है।

क्या बांगरमऊ सीएचसी सुधर गई

इस विषय में बातचीत करने पर बांगरमऊ क्षेत्र के पूर्व विधायक व पूर्व स्वास्थ्य राज्यमंत्री कहा कि स्वास्थ्य विभाग यदि किसी एक मरीज को भी HIV प्रमाणित करके बताता कि यह व्यक्ति एचआईवी पॉजिटिव है। तब झोलाछाप डॉक्टर की गलती हो सकती थी। जब किसी की जानकारी में ही नहीं है तो झोलाछाप डॉक्टर को दोषी कैसे बनाया जा सकता है। सीएचसी में तैनात डॉक्टरों की उपेक्षा के कारण सस्ते के नाम पर झोलाछाप डॉक्टरों के यहां बड़ी संख्या में भीड़ लगती है और वह आसानी से उपलब्ध है।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग कह चुका है कि तीन सेकेंड से ज्यादा एचआईवी के वायरस खुले में नहीं रह सकते। फिर कैसे इंजेक्शन के रूप में HIV एचआईवी बांटने की चर्चा होती है। बेबी ने कहा कि जिन्हें HIV नहीं है वह भी बदनामी के डर से घर बार छोड़ने को मजबूर है। आज फेरी वाले चर्चा में आ चुके गांव में जाने से परहेज करते हैं। उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी से पूछा कि नए प्रभारी आने के बाद क्या सीएचसी में कुछ बदलाव आया है। आज भी पुराने ढर्रे पर चल रहा है सीएचसी। स्वास्थ्य राज्यमंत्री ने बांगरमऊ में एचआईवी पॉजिटिव HIV पॉज़िटिव जांच केंद्र बनाने की मांग की है।

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