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सिर्फ किताब नहीं महत्वपूर्ण दस्तावेज है ऑपरेशन गंगा, प्रदेश के सैकड़ों छात्रों के रेसक्यू को भी किया संग्रह

Operation Ganga Book: यूक्रेन के मानचित्र को लेकर अगर किताब को पढ़ा और समझा जाए तो न सिर्फ भौगोलिक स्थितियों के हिसाब से ऑपरेशन गंगा की बारीकियों को जीवंत होता देखा जा सकता है, बल्कि इस समय भी जारी इस युद्ध के बहुत सारे सामरिक और राजनीतिक रुख भी समझे जा सकते हैं।

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May 02, 2023
वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तरुण पिथोड़े की किताब 'ऑपरेशन गंगा' का विमोचन

मध्यप्रदेश कैडर के वरिष्ठ आईएएस अफसर तरुण पिथोड़े की किताब ऑपरेशन गंगा इन दिनों चर्चा का केन्द्र बनी हुई है। इस किताब में तरू पिथोड़े ने रूस और यूक्रेन के मध्य हुए युद्ध में फंसे भारतीय बच्चों की सफल वापसी, संघर्ष, परेशानियों को खूबसूरत अंदाज में बताने का प्रयास किया है। यूक्रेन और रूस के मध्य युद्ध की शुरुआत के दौरान यूक्रेन के विभिन्न विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत हजारों भारतीय विद्यार्थियों के सुरक्षित भारत लौटने का संकट खड़ा हुआ था। युद्ध क्षेत्र के बीच से बचाव का कार्य आसान नहीं होने वाला था।

विद्यार्थियों के अलग-अलग शहरों में होने, उनके निकल पाने की स्थितियों की अपुष्ट जानकारी तथा युद्ध की वजह से विमान सेवाओं के निलंबन जैसी कठिनाइयों के बीच भारत सरकार ने बच्चों को सुरक्षित वापस लाने के अपने अभियान 'ऑपरेशन गंगा' को शुरू किया। इसके साथ ही इस ऑपरेशन गंगा किताब में उत्तर प्रदेश के सैकड़ों छात्रों के रेसक्यू की भी कहानी हैं।

ऑपरेशन गंगा किताब पढ़कर छलक आते हैं आंसू
खारकीव में फंसे एक हिम्मती बच्चे की भी दास्तां हैं, जिसने किस तरह बमबाजी के दौरान खुद की और दूसरे प्रदेश के साथियों कों बंकर में पहुंचाने में मदद की। किताब में इस साहसी विद्यार्थी की कहानी को लेखक ने बेहद मार्मिक ढंग से लिखा है। जिसे पढ़कर आंसू भी छलक उठते हैं। यह कार्य कैसे योजनाबद्ध किया गया, कैसे इसके विभिन्न चरण आरंभ हुए और इसके क्रियान्वयन में आई मुश्किलों को तरुण पिथोड़े जी ने यथासंभव विस्तार से अपनी किताब में दर्ज किया है। इस किताब का प्रकाशन ब्लूम्सवरी ने किया है।

“किताब के माध्यम से वहां के राजनीतिक रुख समझा जा सकता”
यूक्रेन के मानचित्र को लेकर अगर किताब को पढ़ा और समझा जाए तो न सिर्फ भौगोलिक स्थितियों के हिसाब से ऑपरेशन गंगा की बारीकियों को जीवंत होता देखा जा सकता है, बल्कि इस समय भी जारी इस युद्ध के बहुत सारे सामरिक और राजनीतिक रुख भी समझे जा सकते हैं। हजारों विद्यार्थियों, दूतावास के अधिकारियों, इन चारों देशों में भेजे गए भारत सरकार के केंद्रीय मंत्रियों तथा विभिन्न भारतीय कंपनियों से मदद को आए लोगों से लेखक ने बातचीत एक डायरी में दर्ज की और फिर इसे किताब का रूप दिया।


विद्यार्थी ही नहीं, कई वर्षों से बसे अन्य भारतीय भी हैं शामिल
पूर्वी यूक्रेन में स्थित शहरों कीव और खारकीव, जो भीषण युद्ध की चपेट में थे, से लेकर तुलानात्मक रूप से कम हमले झेल रहे पश्चिमी इलाकों में रह रहे विद्यार्थियों को रोमानिया, हंगरी, स्लोवाक और पोलेंड की सीमा तक पहुंचना था। हजारों लोगों, जिनमें केवल विद्यार्थी ही नहीं, यूक्रेन में कई वर्षों से बसे अन्य भारतीय भी शामिल हैं, उनकी सुरक्षित वापसी को विस्तार से समझना रोंगटे खड़े कर देने वाला मंजर है। युद्ध के हालात में खतरा, घर वापसी की उत्कंठा और बेगाने देश में अपनी सुरक्षा का भय कई गुना बढ़ जाता है। जिस तरह भारत ने अपने युवाओं को निकाला, वो विश्व में सराहा गया। मदद के हजारों हाथों का विवरण किताब में है। इसे जरूर पढ़ा जाना चाहिए।

Updated on:
02 May 2023 05:33 pm
Published on:
02 May 2023 05:32 pm
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