बिकरू गांव में अपराधियों की गोलियों से शहीद सीओ देवेंद्र मिश्रा की एक चिट्ठी सोशल मीडिया (SO Devendra Mishra Letter) पर तहलका मचा रही है।
लखनऊ. बिकरू गांव में अपराधियों की गोलियों से शहीद सीओ देवेंद्र मिश्रा की एक चिट्ठी सोशल मीडिया (SO Devendra Mishra Letter) पर तहलका मचा रही है। इस वायरल चिट्ठी में निलंबित एसओ विनय तिवारी और हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे (Vikas Dubey) का गठजोड़ के बारे में बयां किया गया है। पत्र में विनय तिवारी पर विकास दुबे की मदद का आरोप लगा है। पत्र में ये भी कहा गया है कि अगर समय रहते विनय तिवारी ने अपनी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं किया, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। यह चिट्ठी तत्कालीन एसएसपी आनंद देव तिवारी को लिखी गई है जो कि पुलिस रिकॉर्ड से गायब है। चिट्ठी पर तत्कालीन एसएसपी का कहना है कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है।
पत्र में कही गई ये बात
एसएसपी दिनेश कुमार पी ने बताया कि काफी पड़ताल के बाद भी सीओ द्वारा लिखा पत्र नहीं मिला है। एसएसपी ने बताया कि शहीद सीओ देवेंद्र मिश्रा द्वारा विभाग को लिखा गया वायरल पत्र जिसमें उन्होंने एसओ विनय तिवारी पर विकास दुबे की मदद का आरोप लगाया है, वह पोलकी रिकॉर्ड में नहीं मिला है। एसपीआरए समेत एसएसपी ऑफिस में इसकी पड़ताल की गई है। डिस्पैच और रिसीविंग रजिस्टर में भी कोई रिकॉर्ड नहीं मिला है।
वायरल पत्र में बताया गया है कि विकास दुबे के खिलाफ 13 मार्च को सेक्शन-386 (मौत का डर दिखाकर वसूली) और अन्य दफाओं में रिपोर्ट लिखी गई थी। विकास के खिलाफ कई जिलों में 150 मुकदमे हैं। इस मामले में चौबेपुर थाने के तत्कालीन एसओ विनय तिवारी को विकास के खिलाफ कठोर कार्रवाई का आदेश दिया गया था।
इसके बाद 14 मार्च को केस की समीक्षा हुई तो पता चला कि जांच अधिकारी अजहर इशरत ने धारा-386 हटा दी। विवेचक ने जीडी में भी दर्ज किया है कि एसओ के कहने पर धाराएं हटाई गईं। यह भी पता चला है कि विनय का पहले से ही विकास दुबे के पास आना-जाना रहा है। चिट्ठी की बात सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है। एसएसपी ने कहा है कि इस मामले में गहनता से जांच की जा रही है।
एक दिन का रोकेंगे वेतन
शहीद पुलिसकर्मियों के परिवारों के प्रति एकजुटता दिखाने के लिए कानपुर के सभी पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने एक दिन का वेतन देने का फैसला किया है।