बोले, संवैधानिक संस्थाओं से छेड़छाड़ कर रही बीजेपी,। मुख्य मुद्दों से ध्यान भटकाने को छोड़ा गया है तीन तलाक पर कानून का मुद्दा।
वाराणसी. प्रदेश के पूर्व मंत्री और समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता अहमद हसन ने बुधवार को वाराणसी में बीजेपी पर करारा हमला बोला। कानपुर, आगरा और मेरठ में निकाय चुनाव के प्रथम चरण के मतदान के दौरान ईवीएम में गड़बड़ी और लाठीचार्ज के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि बीजेपी का इमानदारी से दूर-दूर का कोई रिश्ता नहीं। वे इसी तरह से चुनाव जीतना चाहती है। सपा नेता ने कहा कि ईवीएम मुद्दे पर समाजवादी पार्टी सहित समूचा विपक्ष एक मत है, लेकिन चुनाव आयोग अपनी बात पर अड़ा है। दरअसल भाजपा ने देश की सभी स्वायत्तशासी संवैधानिक संस्थाओं पर कब्जा कर रखा है। यह देश के लिए बड़ा संकट है। तीन तलाक पर संसद के शीत सत्र में कानून बनाने की बात पर सपा नेता ने कहा कि कानून बनाने से किसने रोका है लेकिन इस समय जब गुजरात में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं उस वक्त ऐसी बातों को उछालने का क्या मकसद हो सकता है यह जनता समझ रही है।
मीडीया से मुखातिब अहमद हसन ने तीन तलाक पर संसद के शीत सत्र में कानून बनाने के केंद्र सरकार के प्रयास पर कहा कौन रोक रहा है, अब तो उलेमा काउंसिल ने भी कह दिया है कि हमारे यहां तीन तलाक नहीं। वो कानून बनाएं लेकिन यह शिगूफा गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान छेड़ने का क्या मतलब है। निःसंदेह यह गुजरात के मुस्लिम वोटरों को लुभाने के लिए लाया गया है। लेकिन जनता बीजेपी के फरेब को समझ चुकी है। उन्होंने कहा कि दरअसल बीजेपी मुख्य मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने के लिए हिंदू-मुस्लिम का मसला उठाती रहती है ताकि लोग आपस में ही उलझे रहे। उनका ध्यान भूख, गरीबी, सेहत, शिक्षा, किसान और किसानी की ओर जाए ही नहीं। लेकिन समाजवादी पार्टी के साथ जनता 2019 के लोकसभा चुनाव में इसका जवाब दे देगी। झूठ व फरेब ज्यादा दिन तक नहीं चलने वाला।
विधानपरिषद में नेता प्रतिपक्ष अहमद हसन ने योगी सरकार के बजट की चर्चा करते हुए कहा कि माध्यमिक शिक्षा, सिंचाई, लघु सिंचाई, पशुपालन, उच्च शिक्षा सभी के बजट में बड़ी कटौती कर दी है। बताया कि माध्यमिक शिक्षा के अखिलेश सरकार ने 2016-17 के बजट में 9990 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था उसे घटा कर योगी सरकार ने 576 करोड़ कर दिया है। इसी तरह सिंचाई में सपा सरकार ने 5126 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था जिसे भाजपा सरकार ने घटा कर 647 करोड़ रुपये कर दिया है। समाजादी पेंशन को इस सरकार खत्म ही कर दिया जिससे लाखों गरीब परिवारों का आर्थिक स्त्रोत ही खत्म हो गया है।