
वाराणसी. बीएचयू में लाठीचार्ज के बाद परिसर में जो आगजनी हुई थी उसकी अंाच आज भी महसूस हो रही है। बीएचयू में नियुक्ति को लेकर सबसे अधिक मारामारी रहती है। नियुक्ति को लेकर परिसर में चिंगारी सुलग रही थी, जिसमे लाठीचार्ज की ऐसी हवा लगी कि परिसर भड़क उठा। फिलहाल परिसर में अब शांति है और स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है, लेकिन अब परिसर में हुई नियुक्ति को भी मुद्दा बनाने की तैयारी की गयी है।
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बीएचयू में नियुक्ति को लेकर सपा व बीजेपी को दो नेता लगातार पैरवी कर रहे थे। सपा नेता से जुड़े कुछ लोगों को परिसर में सही मुकाम मिल गया था, लेकिन बीजेपी नेता की दाल नहीं गल रही थी। बाद में सपा नेता के जुड़े नये लोगों को भी परिसर में स्थापित होने के लिए हरी झंडी दिखनी बंद हो गयी। इसके बाद बीजेपी की तरह सपा नेता भी परिसर के वरिष्ठ अधिकारियों से नाराज हो गये। इसके बाद से दोनो नेता समय का इंतजार करने लगे और लाठीचार्ज के बाद परिसर का माहौल ऐसा हो गया कि दोनों नेताओं ने अपनी कसक निकाल दी।
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ABVP का विरोध में आने से भी लोग हुए परेशान
बीएचयू के वीसी का आरएसएस से रिश्ता किसी से छिपा नहीं है। वीसी प्रो.जीसी त्रिपाठी ने सार्वजनिक मंच से कहा था कि मै आरएसएस से जुड़ा हूं और यह अपराध नहीं है। परिसर में इसके पहले भी मारपीट, हंगामा व हड़ताल हुई है। बीएचयू वीसी पर जब विरोधी दल हमला बोलते थे तो बचाव में एबीवीपी आ जाती थी, लेकिन इस बार वीसी सबसे अधिक मुसीबत में फंसे तो एबीवीपी का भी सहारा नहीं मिला। इससे साफ हो जाता है कि आरएसएस में भी वीसी को लेकर सही नहीं चल रहा है। इस विरोध को भी बीजेपी के बड़े नेता से जोड़ कर देखा जा रहा है जो इस समय सांसद भी है,जबकि सपा के पूर्व मंत्री भी अपनी कहानी बता चुके हैं। फिलहाल परिसर के सूत्रों की माने तो अब नियुक्ति का मुद्दा जोर-शोर से उठाने की तैयारी चल रही है, जिसका असर आने वाले दिन में दिखायी देगा।
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