
भरत मिलाप का दृश्य, (Pc-Patrika)
Bharat Milap Kashi: "रघुकुल रीत सदा चली आई, प्राण जाई पर वचन न जाई।" इसी वचन की बानगी काशी में देखने को मिली, जब नाटी इमली स्थित भरत मिलाप मैदान में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम अपने भाई लक्ष्मण के साथ भाई भारत और शत्रुघ्न से मुलाकात करने पहुंचे। मौका था बनवास काटकर वापस घर आने का। सूर्य की अचलगामी किरणे जब मैदान के निर्धारित स्थान पर पड़ी तो कुछ मिनट के लिए पूरा मैदान भावनाओं में डूब गया। भगवान श्री राम और भाई लक्ष्मण दौड़ते हुए भाई भरत और शत्रुघ्न के पास पहुंचे और स्वागत में भरत और शत्रुघ्न जमीन पर लेट गए। वहीं, दूसरी तरफ भगवान राम और लक्ष्मण भी उन्हें देखकर दौड़ पड़े और उन्हें उठाकर गले लगाया।
काशी में यह लीला 488 वर्ष पुरानी है। इस लीला को देखने के लिए सिर्फ काशी के ही नहीं बल्कि देश के अलग-अलग कोने से, यहां तक की विदेश से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। भगवान राम, लक्ष्मण, भारत और शत्रुघ्न के इस अदभुत मिलन का संयोग लोग अपने मोबाइल के कैमरे में कैद करते नजर आए। इस लीला के लिए स्वयं काशी नरेश भी हाथी पर सवार होकर मैदान में पहुंचे। वहीं, यादव बंधुओ ने अहम भूमिका निभाई। धोती और बनियान पहने, सिर पर पगड़ी बांधकर आंखों में सुरमा लगाए यादव बंधु भगवान श्री राम के पुष्पक विमान को अपने कंधे पर लेकर लीला स्थल तक पहुंचाया।
करीब 5 टन के वजनी पुष्पक विमान को उठाकर यादव बंधु मैदान तक पहुंचे और यह दृश्य इस लीला को देखने वाले लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा। काशी की परंपरा में इसे कहा जाता है कि यदुकुल के कंधों पर रघुकुल का रथ सवार है। इस भारत मिलाप का भावुक पल शाम 4:40 पर देखने को मिलता है। इस दौरान कुछ मिनट के लिए यहां मौजूद लोग भावनाओं में डूबे नजर आए। हर तरफ जय श्री राम का उद्घोष और हर हर महादेव का उद्घोष होता रहा। काशी के लोगों की मान्यता है कि इस दृश्य को देखने के लिए स्वयं देवता भी कुछ मिनट के लिए धरती पर आते हैं।
बताया जाता है कि पूर्व में काशी नरेश महाराज उदित नारायण सिंह ने 1796 में पहली बार इस लीला में शाही अंदाज में भाग लिया था। इसके बाद इस ऐतिहासिक लीला में शामिल होने के लिए काशी राज परिवार की भागीदारी इस परंपरा का एक हिस्सा मानी जाती है। महाराज उदित नारायण सिंह के बाद परिवार की पीढ़ियां इस परंपरा का निर्वहन करती आ रही है। यह आयोजन सिर्फ धार्मिक ही नहीं बल्कि काशी की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का प्रतीक भी माना जाता है। चित्रकूट रामलीला समिति के अध्यक्ष और भरत मिलाप के व्यवस्थापक बाल मुकुंद उपाध्याय ने बताया कि मेघा भगत भगवान श्रीराम को स्वप्न में आकर दर्शन दिए थे और यहां भरत मिलाप कराने का निर्देश दिया। मान्यता है कि यहां भगवान श्रीराम स्वयं उपस्थित होते हैं।
Updated on:
22 Oct 2026, 4:51 PM IST
Published on:
22 Oct 2026, 4:51 PM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.