
वाराणसी. बीजेपी के मंत्री का ही नाम सूची में गायब होने की जानकारी मिलते ही हड़कंप मच गया है। जिला प्रशासन का आला अधिकरी सक्रिय हो गये और कार्रवाई का चाबुक भी चलाया गया है। जिला प्रशासन ने नगर निगम चुनाव के लिए पर्याप्त तैयारी का दावा किया था लेकिन मंत्री का ही नाम सूची से कट जाने से सारी तैयारियों की पोल खुल गयी है। प्रकरण बीजेपी के मंत्री से जुड़ा था इसलिए तुरंत ही कार्रवाई हो गयी है। आम आदमी को मतदाता सूची में नाम जोड़वाना होता है तो यह उसके लिए सबसे कठिन काम साबित होता है।
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बीजेपी के विधि न्याय, सूचना, खेल युवा कल्याण राज्यमंत्री डा.नीलकंठ तिवारी का ही नाम मतदाता सूची से गायब हो गया है। राज्यमंत्री का आवास वार्ड नम्बर २७ बिरदोपुर में है। यहां के बूथ संख्या ३२७ के तहत राज्यमंत्री व उनका परिवार का नाम मतदाता सूची में दर्ज रहता है। नगर निगम चुनाव का ऐलान करने से पूर्व मतदाता सूची को अपडेट करने का काम भुवनेश्वरी नामक बीएलओ को मिला है औश्र पर्यवेक्षेक की जिम्मेदारी हरेन्द्र कुमार को मिला था। सूची को अपडेट करने में राज्यमंत्री का नाम ही सूची में दर्ज नहीं कराया गया। इसके चलते मंत्री का ही नाम मतदाता सूची से गायब हो गया। मंत्री डा.नीलकंठ तिवारी को जब इस बात की जानकारी मिली तो उन्होंने जिलाधिकारी को सारे स्थिति से अवगत कराया। इसके बाद प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी बृज भूषण चौधरी ने तत्काल ही बीएलओ व पर्यवेक्षक कार्य में लगे सहायक अध्यापक हरेन्द्र कुमार व भुवनेश्वरी को निलंबित कर बीआरसी चोलापुर से संबद्ध कर दिया है। साथ ही दशाश्वमेध जोन के खंड शिक्षा अधिकारी बृजेश कुमार राय व पिंडरा ब्लाक के बीईओ अशोक कुमार सिंह को मामले की जांच सौंपी है।
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मतदाताओं के सत्यापन में बरती जाती है घार लापरवाही
मतदाता सूची के सत्यापन में घोर लापरवाही बरती जाती है। चुनाव से पहले मतदाता सूची की जांच करायी जाती है। मृत हा चुके लोगों का नाम सूची से हटाया जाता है और बालिग हुए नये लोगों का नाम सूची में शामिल किया जाता है। इसके लिए बीएलओ की ड्यूटी लगायी जाती है जो घर-घर जाकर सूची का सत्यापन करते हैं। आम तौर पर अधिकांश घरों में नहीं जाते हैं और एक ही जगह बैठ कर सूची का सत्यापन कर देते हैं, जिसके चलते लोगों के नाम सूची में दर्ज तक नहीं हो पाते हैं।
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