वाराणसी

विरोधी दलों के लिए बनाये चक्रव्यूह में खुद फंसने लगी है बीजेपी

भगवा पार्टी ने चलाया हुआ है अभियान, जानिए क्या है कहानी
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Updated: 11 Nov 2017, 4:15 PM IST
BJP
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वाराणसी. बीजेपी ने संसदीय चुनाव २०१४ के समय से एक अभियान की शुरूआत की थी जो आज भी जारी है। बीजेपी ने केन्द्र के साथ देश की सत्ता पर कब्जा करने के लिए एक चक्रव्यूह तैयार किया है, जो अब बीजेपी के लिए गले की फांस बन सकता है। बीजेपी ने विपक्ष को कमजोर करने के लिए ही सारी कवायद की है, जिसका खामियाजा भी भगवा पार्टी को उठाना पड़ सकता है।




बीजेपी ने संसदीय चुनाव 2014 के समय से ही विरोधी दलों के नेताओं को तोडऩे की योजना का आगाज किया था जो आज भी जारी है। बिहार व दिल्ली को छोड़ दिया जाये तो बीजेपी को इस योजना को लाभ मिला है। अधिकतर जगहों पर बीजेपी को चुनाव में जीत मिली है। कांग्रेस, सपा व बसपा के नेताओं को तोड़ कर बीजेपी ने यूपी में प्रचंड बहुमत की सरकार बनायी है। इसके बाद बीजेपी ने विरोधी दलों को नेता को तोडऩे के अभियान को तेज कर दिया है। बीजेपी इस अभियान में एक बात भूल चुकी है कि जिन नेताओं को कभी भगवा पार्टी दागी बोलती थी वही अब बीजेपी के दामन को दागदार कर रहे हैं। पूर्वांचल के एक ब्राह्मण नेता अब बीजेपी का भगवा गमछा पहनने की तैयारी में है। यह वही नेता है जो कभी बीजेपी में थे बाद में बसपा का दामन थाम लिया था। मंत्री रह चुके इन नेता के उपर भ्रष्टाचार के मुकदमे हैं इसके बाद भी बीजेपी में इन्हें शामिल करने की तैयारी चल रही है।

नहीं रुका अभियान तो कम हो जायेगा पीएम मोदी का जादू
बीजेपी ने आज जितनी जगहों पर चुनाव जीता है सभी जगहों पर पीएम मोदी का ही जादू चला है। देश की जनता आज भी पीएम पर भरोसा करती है। नोटबंदी के बाद पैसा निकालने में लोगों की जान चली गयी थी, लेकिन किसी ने माहौल बिगाडऩे का प्रयास नहीं किया था यह सब पीएम मोदी पर जनता का विश्वास दर्शाता है। परिवारवाद, भ्रष्टाचार व घोटाले को लेकर विरोधी दलों पर हमला करने वाले पीएम मोदी की पार्टी में जिस तरह से सभी लोगों को शामिल किया जा रहा है, उसे बीजेपी की छवि खराब होती जा रही है। एक बार जनता के मन से पीएम मोदी के प्रति विश्वास कम होने लगेगा तो फिर बीजेपी की राह कठिन हो जायेगी।

नहीं रहेगा नेता तो विरोधी दल कैसे जीतेंगे चुनाव
विरोधी दलों में बड़े नेता नहीं रहेंगे तो वह चुनाव कैसे जीतेंगे। बीजेपी इसी सोच के साथ काम कर रही है। बसपा के जितने भी कद्दावर नेता ने पार्टी छोड़ी है उसमे से अधिकांश बीजेपी में शामिल हो गये हैं। असम में कांग्रेस के एक बड़े नेता ने ही बीजेपी को सत्ता तक पहुंचाया। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के खास माने जाने वाले नेता को बीजेपी में शामिल कराया गया है। यूपी में सपा, बसपा व कांग्रेस के कई नेता बीजेपी में जा चुके हैं और कई अन्य नेताओं को पार्टी तोडऩे में जुटी है। चुनावी जीत के लिए बीजेपी ने जो अभियान चलाया है वह दागियों के चलते भगवा पार्टी पर भारी पड़ सकता है।

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