
वाराणसी. डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या ने अखिलेश यादव का झटका देने के लिए बड़ा दांव खेला है। मुलायम सिंह यादव के संसदीय क्षेत्र आजमगढ़ के अतरौलिया में हुई रैली में हारे हुए प्रत्याशी को बीजेपी का विधायक बता दिया है। सपा व बीजेपी के बीच सोशल इंजीनियरिंग की जंग तेज हो गयी है, जिस दल को जातियों के वोट बैंक में अधिक सेंधमारी करने का मौका मिलेगा। उस दल को लोकसभा चुनाव 2019 में फायदा होगा।
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डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या ने आजमगढ़ के अतरौलियां में सभा के दौरान पीएम नरेन्द्र मोदी व सीएम योगी आदित्यनाथ सरकार की जमकर तारीफ की है। साथ ही उन्होंने सपा व बसपा सरकार पर हमला भी बोला है। किसी भी दल के राजनीति रैली में यही बाते होती है। डिप्टी सीएम की उस बात ने लोगों को अचरज में डाल दिया है, जिसमें उन्होंने कहा कि यहां से बीजेपी प्रत्याशी कन्हैया निषाद चुनाव भले ही हार गये हैं लेकिन हम उन्हें विधायक ही मानते हैं। इस क्षेत्र के लोगों को किसी तरह की समस्या होती है तो वह सांसद नीलम सोनकर व कन्हैया निषाद से सहयोग ले सकते हैं। अतरौलिया को निषाद बाहुल्य क्षेत्र माना जाता है। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या ने खास कारणों से यह बयान दिया था। डिप्टी सीएम ने निषाद लोगों को यह बताया है कि बीजेपी में उनकी बहुत इज्जत है और बीजेपी हमेशा ही उनके साथ है। डिप्टी सीएम के बयान से साफ हो जाता है कि बीजेपी एक बार फिर से अपनी सोशल इंजीनियरिंग को मजबूत करने में लगी है।
अखिलेश यादव के दांव पर किया है पलटवार
अखिलेश यादव पर खास जाति की राजनीति करने का आरोप लगता था। यूपी चुनाव के बाद अखिलेश यादव ने सपा की सोशल इंजीनियरिंग को मजबूत करने का काम शुरू किया है। इसी क्रम में गोरखपुर में हुए उपचुनाव में निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा.संजय निषाद के बेटे प्रवीष निषाद को प्रत्याशी बनाया था। प्रवीष निषाद ने सीएम योगी के प्रत्याशी को उनके ही गढ़ में हरा कर नया इतिहास बनाया है। चुनाव परिणाम के बाद सपा से तेजी से निषाद जुड़ते जा रहे हैं इससे परेशान बीजेपी ने नया दांव खेला है इसी क्रम में निषाद लोगों को बीजेपी से जोडऩे के लिए ही डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या ने ऐसा बयान दिया है।
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पीएम नरेन्द्र मोदी की लहर में भी बीजेपी को आजमगढ़ संसदीय सीट पर हार का सामना करना पड़ा था। मुलायम सिंह यादव खुद यहां से चुनाव जीते हैं। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने पहले ही ऐलान किया है कि जिन सीटों पर हम चुनाव हारे हैं वहां के लिए खास रणनीति बना रहे हैं, जिससे लोकसभा चुनाव 2019 में बीजेपी प्रत्याशियों को जीत मिल सके। इसके लिए बीजेपी भी अपनी सोशल इंजीनियरिंग मजबूत करने में लगी है। बीजेपी को लग रहा है कि जिस जाति के नेता सपा व बसपा गठबंधन को फायदा पहुंचा सकते हैं उन्हीं जाति के दूसरे नेताओं को प्रमोट करने की योजना पर काम शुरू होने वाला है।
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