सेतु निगम पर ही फोड़ा जा रहा सारा ठीकरा, प्रशासनिक अधिकारियों की नहीं तय की जा रही जबावदेही
वाराणसी. यूपी के तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव के राज में 15 अक्टूबर 2016 को बनारस के राजघाट पुल पर भगदड़ मच गयी थी। भगदड़ में 24 लोगों की मौत हो गयी थी। सपा सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन डीएम व एसएसपी समेत आधा दर्जन से अधिक अधिकारियों को हटा दिया था। सीएम योगी आदित्यनाथ सरकार में चौकाघाट फ्लाईओवर हादसा हो चुका है, जिसमे 18 लोगों की जान जा चुकी है। इस घटना का सारा ठीकरा सेतु निगम पर ही फोड़ा जा रहा है जबकि ऐसे हादसों में प्रशासनिक अधिकारियों की जबावदेही तय होनी चाहिए। एक मंत्री के इशारे पर अन्य अधिकारियों को बचाने में जुटी यूपी सरकार पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
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अखिलेश यादव की सरकार के समय राजघाट पुल पर भगदड़ मचने से २४ लोगों की जान गयी थी। अखिलेश यादव ने घटना के बाद जिलाधिकारी विजय किरन आनंद व एसएसपी आकाश कुलहरि के साथ आधा दर्जन से अधिक अधिकारियों पर कार्रवाई की थी। बाबा जयगुरुदेव के समागम में जा रही भीड़ को लेकर सपा सरकार पर जमकर सवाल उठे थे। शिवपाल यादव पर भी कई आरोप लगे थे। अखिलेश यादव ने जब कार्रवाई का चाबुक चलाकर व्यवस्था सुधारने का प्रयास किया था। लेकिन सीएम योगी सरकार की कहानी कुछ अलग है। हादसे के बाद भी लापरवाही जारी है लेकिन एक मंत्री के इशारे पर उनके खास अधिकारियों को बचाया जा रहा है जबकि घटना इतनी भयानक है और बड़े अधिकारियों पर कोई जबावदेही तय नहीं की जा रही है।
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चौकाघाट फ्लाईओवर हादसे के लिए सेत निगम की जिम्मेदारी सबसे बड़ी है लेकिन निर्माणाधीन फ्लाईओवर का निरीक्षण करने वाले मंत्री व अधिकारी इस चीज को क्यों नहीं देख पाये हैं कि फ्लाईओवर की बीम आपस में नहीं जोड़ी गयी है। एसपी ट्रैफिक ने जब निर्माणाधीन फ्लाईओवर की अव्यवस्थता के चलते सेतु निगम पर मुकदमा दर्ज कराया था तो भी किसी अधिकारी ने कार्रवाई नहीं करायी। अब जब दुर्घटना हो चुकी है तो बड़ों को बचाने व छोटों पर गाज गिराने का खेल शुरू हो गया है।
बीएचयू पोस्टमार्टक हाउस कांड में सिर्फ चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पर हुई कार्रवाई
फ्लाईओवर हादसे के बाद जब पोस्टमार्टक हाउस पर परिजनों से सुविधा शुल्क मांगने के प्रकरण पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को तुरंत जेल भेज दिया गया। इतनी बड़ी घटना के बाद वहां पर पोस्टमार्टम होना था तो किसी सक्षम अधिकारी की तैनाती क्यों नहीं की गयी। इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई का चाबुक चलाया जायेगा। सीएम योगी सरकार में बड़ों को बचाने व छोटों को फंसाने के खेल से जनता में आक्रोश बढ़ता जा रहा है जिसका सीधा नुकसान संसदीय चुनाव २०१९ में हो सकता है।
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पीएम नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र का यह हाल
पीएम नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस का यह हाल है तो अन्य जगहों पर कैसी स्थिति होगी। फ्लाईओवर दुर्घटना से सरकार की साख पर सवाल उठाये हैं इसके बाद सीएम योगी सरकार घटना की जबावदेही तय करने के बजाये अधिकारियों को बचाने मेंं जुट गयी है।
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