
Shree Kashi Vishwanath Temple And Gyanwapi Mosque Case: काशी के बहुचर्चित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद के मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दोनों पक्ष आपसी सहमति के लिए कचहरी स्थित मीडियेशन सेंटर पहुंचे। मुस्लिम पक्ष के अधिवक्ता एकलाख अहमद, मुमताज जबकि हिन्दू पक्ष से अधिवक्ता सुभाष चतुर्वेदी, सुधीर त्रिपाठी और सीता साहू, मंजू देवी समेत चारों वादी महिलाएं मिडियेशन सेंटर पहुंची। इस मामले में दोनों पक्षों ने कहा है कि आपसी बातचीत से हल नहीं निकल सकता। दोनों पक्ष कोर्ट में इस मामले को सुलझाने पर सहमत हुए हैं।
हिंदू पक्ष ने यह दलील दी है कि एएसआई ने जब मस्जिद परिसर में सर्वे किया था, उस दौरान हिंदू मंदिर में लगने वाले कई सिंबल मिले थे। इसके कारण यह साबित होता है कि परिसर मस्जिद नहीं बल्कि मंदिर है और जानबूझकर मस्जिद के रूप में अतिक्रमण किया गया है। मुस्लिम पक्ष को स्वेच्छा से मस्जिद को हिंदू पक्ष को सौंप देना चाहिए। वहीं, मुस्लिम पक्ष ने दावा किया है कि ज्ञानवापी मस्जिद किसी तरह से अतिक्रमण करके नहीं स्थापित की गई है। वह मस्जिद का ही हिस्सा है।
हिंदू पक्ष के अधिवक्ता सुधीर त्रिपाठी ने कहा कि मंदिर में सर्वे किए जाने के बाद एएसआई ने 850 पन्नों की एक रिपोर्ट तैयार की थी। उन्होंने दावा किया कि उस रिपोर्ट के हिसाब से यह साबित हुआ कि वह मंदिर ही है। इसके साथ ही उन्होंने परिसर में मिले शिवलिंग को फव्वारा कहा था। उन्होंने बताया कि इस मामले में मध्यस्थता असफल होने की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में भेजी जाएगी। इसके बाद इस मामले को कोर्ट में ही निस्तारित किया जाएगा।
इस मामले में अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री जितेन्द्रानन्द सरस्वती ने कहा है कि श्रीराम जन्मभूमि, श्रीकृष्ण जन्मभूमि और काशी ज्ञानवापी जैसे विषय करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़े हैं। इसलिए इन मामलों में संविधान और न्यायपालिका की निर्धारित प्रक्रिया के तहत अंतिम निर्णय होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अदालत का फैसला ही सभी पक्षों के लिए स्वीकार्य और स्थायी समाधान का आधार बन सकता है। हालांकि, जितेन्द्रानन्द ने सर्वोच्च न्यायालय के सुझाव का सम्मान व्यक्त किया है।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को लेकर सीधा निर्णय देने का बजाय लोक अदालत और मध्यस्थता के माध्यम से समाधान निकालने का निर्देश दिया था। बता दें कि 21 और 23 अगस्त को 3 दिनों की विशेष लोक अदालत लगेगी, जहां दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठकर इस मामले में आपसी सहमति से फैसला लेना था। सुप्रीम कोर्ट ने उम्मीद भी जताई थी कि इसमें सकारात्मक रास्ता जरूर निकलेगा।