गर्भगृह के अंदर बाबा विश्वनाथ को गर्मी ना लगे इसके लिए मंदिर प्रशासन ने उचित व्यवस्था की है, जो अक्षय तृतीया से शुरू हो जाएगी। यहां बाबा के गर्भगृह में फव्वारे की व्यवस्था की जा रही है जो रक्षाबंधन तक जारी रहेगी...
वाराणसी: श्री काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए मंदिर प्रशासन तरह-तरह की व्यवस्थाएं कर रहा है। गर्मी में लोग परेशान ना हो इसको लेकर जर्मन हैंगर, फव्वारे के पंखे और तमाम तरह की व्यवस्थाएं की गई हैं। वहीं अब गर्भगृह के अंदर बाबा विश्वनाथ को गर्मी ना लगे इसके लिए भी मंदिर प्रशासन ने उचित व्यवस्था की है, जो अक्षय तृतीया से शुरू हो जाएगी।
श्री काशी विश्वनाथ धाम में बाबा के गर्भगृह में अक्षय तृतीया पर गर्मी को देखते हुए फव्वारा की व्यवस्था शुरू की जाएगी। ग्रीष्म ऋतु में बाबा को शीतलता प्रदान करने के लिए यह व्यवस्था शुरू की जा रही है। मंदिर प्रशासन ने बताया है कि श्रद्धालुओं के साथ-साथ भगवान के लिए भी फव्वारे की व्यवस्था शुरू की जाएगी और यह रक्षाबंधन तक अनवरत जारी रहेगी।
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य अर्चक पंडित श्रीकांत मिश्रा ने बताया कि यह फव्वारा सुबह से शाम तक 24 घंटे बाबा विश्वनाथ को शीतलता प्रदान करेगा। अक्षय तृतीया के दिन सायंकालीन सप्त ऋषि आरती के साथ ही यह सेवा शुरू कर दी जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रत्येक वर्ष यह व्यवस्था की जाती है और यह रक्षाबंधन तक प्रतिदिन निरंतर रूप से बाबा की सेवा में समर्पित रहती है। उन्होंने कहा कि यह सैकड़ो वर्षों पुरानी परंपरा है, जिसका प्रत्येक साल निर्वाह किया जाता है।
श्रीकांत मिश्रा ने बताया कि जिस तरह भगवान विष्णु को अलंकार प्रिय है, उसी तरह भगवान भोलेनाथ को जल की धारा प्रिय है। इसी वजह से अक्षय तृतीया को फव्वारे की शुरुआत की जा रही है और श्रावण मास की शुक्ल पक्ष के पूर्णिमा पर्यंत रक्षाबंधन तक यह परंपरा जारी रहेगी। उन्होंने बताया कि इस दौरान बाबा का निरंतर जलाभिषेक किया जाएगा।
काशी के लोगों की मान्यता है कि ठंड के मौसम में जिस तरह आम लोगों को ठंडी लगती है, उसी तरह भगवान को भी ठंडी लगती है। इसके साथ ही गर्मी के दिनों में श्रद्धालुओं के साथ भगवान को भी गर्मी लगती है, इसीलिए यह व्यवस्था शुरू की जा रही है। ग्रीष्म ऋतु में यह फव्वारा बाबा विश्वनाथ को शीतलता प्रदान करेगा। यह केवल एक धार्मिक व्यवस्था ही नहीं है बल्कि समस्त काशी वासियों एवं श्रद्धालुओं की गहन आस्था और भावनाओं का प्रतीक भी है।