वाराणसी

बसपा सुप्रीमो मायावती ने खेल दिया बड़ा दांव, बिखर जायेगी बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग

लोकसभा चुनाव 2019 में बसपा को मिलेगा लाभ, बीजेपी के लिए अब इतिहास दोहराना होगा कठिन

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Jun 01, 2018
Mayawati

वाराणसी. बीजेपी ने यूपी चुनाव में प्रचंड बहुमत पाया था। पीएम नरेन्द्र मोदी की लहर के साथ बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग बहुत काम आयी थी और पहली बार बीजेपी की सीट 300 के पार गयी थी लेकिन अब इस इतिहास को दोहरना बहुत कठिन हो गया है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने बड़ा दांव खेल दिया है जिसका संसदीय चुनाव 2019 में भी बड़ा असर होगा।
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यूपी के तत्कालीन सीएम राजनाथ सिंह की सरकार के समय बीजेपी पर कई आरोप लगते थे जिसके चलते बीजेपी एक बार सत्ता से बाहर गयी तो १४ साल तक भगवा पार्टी की वापसी नहीं हुई। बीजेपी जब सत्ता से बाहर थी तो उस समय सपा व बसपा ही प्रदेश पर शासन करती थी इसका मुख्य कारण इन दोनोंं दलों की सोशल इंजीनियरिंग मजबूत होना था। बसपा के साथ दलित व पिछड़े वर्ग का बड़ा भाग जुड़ता था और मुस्लिम वोटर भी साथ आते थे तो प्रदेश में पूर्ण बहुमत की सरकार मिली थी सपा के साथ यादव व सवर्ण वर्ग के वोटर जुड़ते थे यहां भी मुस्लिम जुड़ते थे तो प्रदेश की सत्ता पर सपा का कब्जा होता था। बीजेपी ने संसदीय चुनाव 2014 व 2017 के बाद सोशल इंजीनियरिंग ठीक की थी जिसके चलते यूपी में प्रचंड जीत मिल थी लेकिन सीएम योगी आदित्यनाथ से लेकर संघ के नाम पर कुछ नेता खास जाति कार्ड खेल रहे हैं जिसके चलते बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग कमजोर हो गयी है जिसका उदाहरण फूलपुर, गोरखपुर के बाद कैराना उपचुनाव में देखना को मिला है और भगवा पार्टी को हार का समाना करना पड़ा है।
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मायावती के इस दांव से बसपा को होगा लाभ
बसपा से दलित वोटरों के साथ पिछड़ा वर्ग के लोग भी अलग हो गये थे। राजभर समाज का वोट ओमप्रकाश राजभर के साथ बीजेपी में चला गया। स्वामी प्रसाद मौर्या व डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या के चलते मौर्या वोट बैंक भी बीजेपी से दूर गया। इसके अतिरिक्त यादव वोटर जल्द बसपा से जुड़ते नहीं थे लेकिन सपा गठबंधन के कारण यह वोटर बसपा के साथ आ गये हैं। बसपा सुप्रीमो ने हाल में ही पार्टी संगठन में बड़ा फेरबदल किया है राम अचल राजभर को पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव बनाया है जबकि आरएसएस कुशवाहा को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गयी है। मायावती के इस दांव को संसदीय चुनाव 2019 के लिए बड़ा फायदेमंद माना जा रहा है दोनों जाति के वोटर बीजेपी के साथ चले गये थे जो अब इन नेताओं के चलते बीएसपी में लौट सकते हैं यदि ऐसा हुआ तो बीजेपी को करारा झटका लगना तय है।
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जानिए क्यों कमजोर हो रही बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग
बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग कमजोर हो गयी है। बीजेपी ने अलग-अलग जाति के नेताओं को मंत्री पद दो दिया है लेकिन उन्हें इतनी ताकत नहीं दी गयी है कि अपनी जाति के लोगों का ही भला कर सके। प्रशासन से लेकर पुलिस तक में जिस तरह से संघ व बीजेपी के नाम पर खास जाति की तैनाती हो रही है उससे समाज का बड़ा वर्ग खुद को छला हुआ महसूस कर रहा है इसके चलते बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग तेजी से कमजोर हो रही है यदि बीजेपी ने जल्द ही व्यवस्था में बदलाव नहीं किया तो उपचुनाव के परिणाम संसदीय चुनाव के नतीजे में बदल सकते हैं।
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Published on:
01 Jun 2018 03:40 pm
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