वाराणसी

ज्ञानपावी प्रकरण पर बोले शंकराचार्य निश्चलानंदः रसखान और रहीम को आत्मसात करें मुसलमान, मिलकर साथ चलें…

ज्ञानवापी प्रकरण में अब श्रीगोवर्धनमठ पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने भी मुसलमानो को रहीम और रसखान की जीवन शैली, उनके आदर्शों को आत्मसात करने की सलाह दी है। मीडिया से मुखातिब शंकराचार्य ने ये भी कहा है कि पूर्व में ज्ञानवापी का जो स्वरूप था, उसे पुनः उसी स्वरूप में होना चाहिए।

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Jun 02, 2022
श्रीगोवर्धनमठ पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती

वाराणसी. मुसलमान सज्जनों से अनुरोध है कि उनके पूर्वजों ने मानवाधिकार की सीमा का अतिक्रमण कर जो कदम उठाए थे, उसे आदर्श न मानते हुए मानवता का परिचय दें और हमारे साथ मिलकर चलें। रहीम और रसखान की जीवन शैली को आत्मसात करने का प्रयास करें। ये कहना है श्रीगोवर्धनमठ पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती का। उन्होंने ज्ञानवापी प्रकरण पर मीडिया से बातचीत में ये बातें कहीं। उन्होंने कहा पूर्व में ज्ञानवापी का जो स्वरूप था, उसे पुनः उसी स्वरूप में होना चाहिए। शंकराचार्य ने बताया कि वह काशी प्रवास के दौरान हिंदुओं के हित को ध्यान में रखते हुए बैठक करेंगे। हिंदू राष्ट्र संगोष्ठी का आयोजन भी होगा।

मोहम्मद साहब और ईसा मसीह के पूर्वजों को बताया सनातनी आर्य

शंकराचार्य ने सवालिया अंदाज में कहा कि मोहम्मद साहब और ईसा मसीह के पूर्वज कौन थे? फिर खुद ही कहा कि, ये तथ्य डंके की चोट पर साबित है कि सबके पूर्वज सनातनी आर्य थे, जो मुसलमान हिंदुओं को काफिर कहता है, वह यह समझ ले कि जो कुछ कहता है अपने पूर्वजों को कहता है।

अपने मान बिंदुओं को प्रतिष्ठित करने के लिए लगातार प्रयास करते रहें

शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद ने कहा कि अब हम आजाद भारत में हैं। हमें यह प्रयत्न करना चाहिए कि हम अपने ध्वस्त मान बिंदुओं को पुनःप्रतिष्ठित करें। ऐसा करने से हमें दुनिया की कोई ताकत नहीं रोक सकती है। हम भविष्यवाणी ही नहीं करते हैं, बल्कि भविष्य का निर्माण भी करते हैं। श्रीराम सेतु से लेकर अयोध्या के रामलला मंदिर तक इसके उदाहरण हैं। कहा कि मोदी और योगी जो चाहे श्रेय लें, हमें श्रेय नहीं लेना है। लेकिन हमें मानवाधिकारों का ध्यान रखते हुए अपने मान बिंदुओं को प्रतिष्ठित करने के लिए लगातार प्रयास करते रहना चाहिए।

जो कहें प्रमाण के साथ कहें

शंकराचार्य ने कहा कि ताजमहल से लेकर मक्का तक कई उदाहरण हैं, जहां सब कुछ साबित है। ऐसे में हम इतना ही कहेंगे कि सभी लोग शांति का परिचय दें। बुद्धि सदैव सत्य का साथ देती है। पूरा विश्व सत्य के बारे में जानता है। लिहाजा किसी को कुछ कहना है तो वो प्रमाण के साथ बात करे। शंकराचार्य ने बताया कि वह काशी प्रवास के दौरान हिंदुओं के हित को ध्यान में रखते हुए बैठक करेंगे। हिंदू राष्ट्र संगोष्ठी का आयोजन भी किया गया है।

Published on:
02 Jun 2022 10:33 am
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