
वाराणसी. लोकसभा चुनाव 2019 में विजय हासिल करने के लिए राजनीतिक दलों ने दांव खेलना शुरू कर दिया है। यूपी में अखिलेश यादव व मायावती का महागठबंधन है तो दूसरी तरफ पीएम नरेन्द्र मोदी, अमित शाह को बीजेपी और राहुल गांधी व प्रियंका गांधी को कांग्रेस को जीताने की जिम्मेदारी है। यूपी के चुनाव में जाति की राजनीति फिर से हावी हो गयी है। सभी दल इस बात को जानते हैं इसलिए जातीय समीकरण को साधने के लिए सभी ने अपनी रणनीति बना ली है। इस चुनाव में अति पिछड़ा वर्ग का वोटर जिस तरफ का रूख करेगा। वही पार्टी चुनाव में अधिक सफल हो पायेगी।
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सपा व बसपा का अपना कैडर वोटर है। सपा को यादव वर्ग के साथ अन्य पिछड़ों का समर्थन मिलता था जबकि बसपा के पास जाघव वोटर हैं। बसपा प्रत्याशियों के सहारे अन्य जाति के लोगों के वोट को हासिल करती है। बसपा ने इस बार ब्राह्मण वर्ग को अपनी तरफ करने के लिए कई नेताओं को प्रभारी बनाया है। बीजेपी को सवर्ण के साथ अन्य पिछड़ा वर्ग के वोटरों पर भरोसा है जिसके सहारे यूपी चुनाव 2017 में पार्टी ने प्रचंड बहुमत पाया था। यूपी में कमजोर मानी जा रही कांग्रेस ने अपनी ताकत दिखाना शुरू कर दिया है। प्रियंका गांधी के आने से कांग्रेस की शक्ति में इजाफा हुआ है। कांग्रेस ने पिछड़े वर्ग के कई नेताओं को पार्टी से जोड़ कर अपना जनाधार बढ़ाने में जुटी है। यूपी की 80 सीटों पर सभी दलों ने प्रत्याशियों के नाम का ऐलान नहीं किया है। सभी दल के प्रत्याशी सामने आ जायेंगे तब पता चलेगा कि किस जाति के कितने नेता मैदान में है।
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लोकसभा चुनाव में महत्वपूर्ण होगी पिछड़े व अति पिछड़े वर्ग की वोटिंग
पिछड़ों में यादव वर्ग का बड़ा तबका सपा के साथ है जबकि अन्य जाति की वोटिंग पर सभी की निगाहे रहेगी। अनुप्रिया पटेल की अपना दल व ओमप्रकाश राजभर की सुभासपा के साथ भी इसी वर्ग के वोटर है। पिछड़ा वर्ग के वोटर जिस दल के साथ जायेंगे। उसके जीतने की संभावना सबसे अधिक होगी। मुस्लिम मतदाता किसी भी सीट पर हार व जीत का समीकरण बदल सकते हैं। मुस्लिम वोटर उस प्रत्याशी की तरफ जा सकते हैं जो बीजेपी को हराने की क्षमता रखता हो। ऐसे में इस बार के चुनाव में उसी दल को बढ़त मिलेगी। जो पिछड़े व अति पिछड़े वर्ग का वोट हासिल करेगा।
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यूपी का जातिय समीकरण प्रतिशम में, राजनीतिक दलों के अनुसार
मुस्लिम-15 से 16, क्षत्रिय-6 से 7, ब्राह्मण-9 से 10, यादव-13 से 14, मौर्या-4 से 5 प्रतिशत, दलित 20 से 21, निषाद-3 से 4, राजभर 3 से 4, सोनकर-2, नोनिया-2 से 3, कुर्मी-4 से 5 प्रतिशत, कुम्हार-2 से 3 प्रतिशत। इसके अतिरिक्त अन्य जाति 12 से 13 प्रतिशत है।
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पूर्वांचल की 26 सीटों पर जबरदस्त चुनावी लड़ाई
पूर्वांचल की 26 सीटों पर जबरदस्त चुनावी लड़ाई देखने को मिल सकती है। बीजेपी, महागठबंधन व कांग्रेस के त्रिकोणीय लड़ाई में यह सीटे फंसी है। पिछली बार बीजेपी ने 26 में से 25 सीटों पर विजय हासिल की थी इसलिए बीजेपी की प्रतिष्ठा अधिक दांव पर लगी है। महागठबंधन के भविष्य के लिए भी यह सीटे बेहद महत्वपूर्ण है जबकि कांग्रेस को फिर से केन्द्र की सत्ता तक पहुंचना है तो इन सीटों पर जादू दिखाना होगा। जबकि राजा भैया व शिवपाल यादव की पार्टी भी पहली बार चुनाव में उतरने वाली है ऐसे में सवर्ण के साथ पिछड़ा वर्ग के वोटर में बिखराव होना संभव है।
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