
वाराणसी. कैबिनेट मंत्री व सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर के यू-टर्न लेने से बीजेपी को बड़ी राहत मिल गयी है। बीजेपी व सुभासपा के रिश्ते बेहद खराब हो चुके हैं ऐसे में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के आगमन से पहले ही निर्णय हो गया है। लोकसभा चुनाव 2019 में बीजेपी बनाम महागठबंधन की लड़ाई के चलते स्थानीय दलों की भूमिका बहुत अधिक हो गयी है।
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लोकसभा चुनाव 2019 के पहले सभी दलों ने अपनी ताकत दिखाना शुरू कर दिया है। अपना दल कृष्णा गुट ने पार्टी के संस्थापक डा.सोनेलाल पटेल की जयंती पर एक जनसभा का आयोजन किया है। माना जा रहा है कि जनसभा के जरिए श्रीमती कृष्णा पटेल ने अपनी ताकत दिखायी है। अपना दल की रैली में महागठब्ंधन की ताकत भी लगी है। सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने इस रैली में जाने का निर्णय किया था। बीजेपी के विरोधी खेमे में जाकर सुभासपा बड़ा संदेश देना चाहती थी लेकिन अचानक ओमप्रकाश राजभर ने यू-टर्न लेते हुए श्रीमती कृष्णा पटेल की रैली से दूरी बना ली है। इससे बीजेपी को बड़ी राहत मिल गयी है। सुभासपा ने पहले ही चार जुलाई को लखनऊ में पार्टी की पदाधिकारियों की बैठक आहुत कर बीजेपी से गठबंधन पर निर्णय लेने का ऐलान किया है। खास बात है कि इसी दिन पीएम नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में अमित शाह आयेंगे।
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लोकसभा चुनाव 2019 में सीटों को लेकर हो रही है लड़ाई
बीजेपी व सुभासपा के बीच की लड़ाई का कारण लोकसभा चुनाव 2019 की सीटे हैं। ओमप्रकाश राजभर के पास अखिलेश यादव व मायावती के गठबंधन में जाने के अतिरिक्त बीजेपी के साथ रहने का भी मौका है। बीजेवी व महागठबंधन में जो अधिक सीट सुभासपा को देगा। ओमप्रकाश राजभर की पार्टी उधर जा सकती है। सुभासपा ने बीजेपी गठबंधन छोड़ा तो कैबिनेट मंत्री के पद से भी इस्तीफा देना पड़ जायेगा। सुभासपा आगे की क्या रणनीति बनाती है इसका खुलासा चार जुलाई को भी हो सकता है।
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