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देश के एकलौते धन्वंतरि मंदिर में शुरू हुआ दर्शन, कुछ घंटे के लिए श्रद्धालुओं को मिलेगा मौका, जानें क्या है मान्यता

Varanasi latest news: देश का इकलौता धन्वंतरि मंदिर आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया है। यह मंदिर पूरे साल में केवल धनतेरस के दिन ही खोला जाता है और सिर्फ 5 घंटे ही श्रद्धालुओं को भगवान धन्वंतरि के दर्शन प्राप्त होते हैं
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वाराणसी

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Vijendra Mishra

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Updated: 6 Nov 2026, 5:53 PM IST

Varanasi news

आयुर्वेद के देवता भगवान धन्वंतरि, (Pc-Vijendra Mishra)

Dhanwantri Temple Varanasi: देश का इकलौता धन्वंतरि मंदिर आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया है। यह मंदिर पूरे साल में केवल धनतेरस के दिन ही खोला जाता है और सिर्फ 5 घंटे ही श्रद्धालुओं को भगवान धन्वंतरि के दर्शन प्राप्त होते हैं। पूरे विधि विधान से पूजा करने के बाद यह मंदिर आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस धनवंतरी मंदिर की देख रेख काशी का एक वैध परिवार करता है। मान्यता है कि भगवान धन्वंतरि के दर्शन मात्र से ही रोग और दुख दूर हो जाते हैं।

केवल 5 घंटे दर्शन

वाराणसी के सुड़ियां इलाके में बना धन्वंतरि मंदिर साल के 364 दिन बंद रहता है। इसे धनतेरस के दिन शाम 5 बजे खोला जाता है और रात 10 बजे तक श्रद्धालु यहां दर्शन पूजन करते हैं। इसके बाद मंदिर का कपाट एक बार फिर से बंद कर दिया जाता है और फिर दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को पूरे साल का इंतजार करना पड़ता है। काशी में रहने वाला एक वैध परिवार धनतेरस पर धन्वंतरि की जयंती मानता है और यह परंपरा पिछले 300 सालों से चली आ रही है। इस समय परिवार की आठवीं पीढ़ी इस परंपरा को निभा रही है।

इस मंदिर की खास बात यह है कि यहां जड़ी बूटियों की पूजा की जाती है। यहां तक कि हिमालय से लाई गई दुर्लभ जड़ी बूटियां भी यहां उपलब्ध है। इसके साथ ही फूल और पौधे भगवान धन्वंतरि को चढ़ाए जाते हैं और आरोग्य का प्रसाद भक्तों के बीच वितरित किया जाता है। लोगों का मानना है कि सिर्फ दर्शन भर कर लेने से ही बीमारियों से लोगों को मुक्ति मिल जाती है। जिस किसी के भी परिवार में लंबे समय से गंभीर बीमारी से कोई मरीज पीड़ित है, उसे यहां लाकर मन्नत मांगने से वह बीमारी से मुक्त हो जाता है।

समुद्र मंथन से जुड़ी है परंपरा

पौराणिक कथाओं के मुताबिक, समुद्र मंथन के दौरान भगवान विष्णु ने ही धन्वंतरि का अवतार लिया और अपने हाथ में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उस समय से धनतेरस का त्यौहार मनाया जाता है और भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद का देवता माना जाता है। इस मंदिर की देखरेख करने वाले परिवार ने दावा किया है कि भगवान धनवंतरी का काशी में यह इकलौता मंदिर है और पूरे देश में इस तरह का मंदिर कहीं भी स्थापित नहीं किया गया है।