संसदीय क्षेत्र बनारस में खुद भ्रमण के दौरान स्टेशन भी देखने गये थे पीएम मोदी, अब उठ रहे गुणवत्ता पर सवाल
वाराणसी. पीएम नरेन्द्र मोदी ने जिस रेलवे स्टेशन को संवारने का जिम्मा उठाया है उसी स्टेशन में चल रहे निर्माण कार्य की गुणवत्ता की बारिश ने पोल खोल दी है। स्टेशन को इंटरनेशनल स्तर को बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किये जा रहे हैं लेकिन निर्माण कार्य में मानक का ध्यान नहीं देने के चलते ही बारिश में यह हाल हो गया है।
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पीएम नरेन्द्र मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र बनारस के कैंट रेलवे स्टेशन को इंटरनेशनल स्तर का बनाने के लिए करोड़ों की योजना स्वीकृत की है। काम भी तेजी से चल रहा है। कैंट रेलवे स्टेशन का प्लेटफार्म नम्बर एक को इतने सुंदर ढंग से बनाया गया था कि देखने वाले खुश हो जाते थे। पीएम मोदी जब बनारस के दौरे पर आये थे तो उन्होंने रात्रि भ्रमण के दौरान बाहर से कैंट रेलवे स्टेशन भी देखा था। रंग-बिरंगी रोशनी में नये स्टेशन को देख कर पीएम भी खुश हुए होंगे। अभी तक सारी चीज ठीक चल रही थी लेकिन बीते दिनों हुई बारिश ने व्यवस्था की पोल खोल दी। बारिश के स्टेशन के अंदर झरने की तरह पानी गिरने लगा। प्लेटफार्म नम्बर एक पर खड़े लोगों को समझ नहीं आ रहा था कि इतना सुंदर दिख रहा स्टेशन का यह हाल हो सकता है। जिस तरह से बारिश का पानी प्लेटफार्म तक पहुंचा है उससे निर्माण के दौरान गुणवत्ता पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। स्टेशन की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही बीजेपी भी बैकफुट पर आ गयी।
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जमकर नहीं हो रही बारिश, फिर भी हुआ यह हाल
बनारस में अभी तक जमकर पानी नहीं बरसा है जब कैंट रेलवे स्टेशन का यह हाल हो गया है यदि झमाझम बारिश हो जाये तो स्टेशन का क्या हाल होगा। स्टेशन निर्माण की गुणवत्ता अब सवालों के घेरे में आ गयी है। बीजेपी के लिए बनारस का विकास कार्य बहुत महत्वपूर्ण है। लोकसभा चुनाव 2019 को बनारस विकास के नाम से लडऩे की तैयारी की गयी है लेकिन जिस तरह बारिश में कैंट रेलवे स्टेशन पर पानी का झरना गिरा है उससे सारी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गये हैं।
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पीएम नरेन्द्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट का है यह हाल
पीएम नरेन्द्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट को लेकर ऐसी लापरवाही बरती जा रही है तो अन्य योजनाओं का क्या हाल होगा। बनारस में जनवरी में प्रवासी सम्मेलन होना है जिसकी मेजबानी खुद पीएम मोदी करने वाले हैं इसके चलते जनवरी से पहले रेलवे स्टेशन को नया रुप दिया जाना है। अधिकारियों ने स्टेशन निर्माण की गुणवत्ता को नजरअंदाज करने में जुटे हुए हैं जिसकी कलई बारिश ने खोल दी है।
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