पीएम मोदी के गढ़ में मिली चाय बेचने वाले को जीत

अनूप सोनकर ने दर्ज किया इतिहास, राहुल की खाट नहीं आयी युवाओं को पसंद
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Updated: 26 Sep 2016, 9:31 PM IST
Mahatma Gandhi Kashi Vidyapith
Mahatma Gandhi Kashi Vidyapith
वाराणसी. वर्ष 2014 का संसदीय चुनाव और पीएम मोदी की चाय की दुकान। पीएम मोदी ने बचपन में चाय बेचने की कहानी क्या सुनायी कि बीजेपी कि किस्मत ही पलट गयी और पहली बार बीजेपी की पूर्ण बहुमत की सरकार बन गयी। इसके बाद भी चाय पर चर्चा का दौर जारी है। इसी चर्चा में सोमवार को एक और कहानी जुड़ गयी है। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ छात्रसंघ चुनाव में एक चाय बेचने वाले ने चुनाव जीत कर अपनी क्षमता साबित की। जबकि दूसरी तरफ अध्यक्ष बने अनूप सोनकर का नाम भी इतिहास में दर्ज हो गया है। सबसे अधिक झटका कांग्रेस के छात्र संगठन राछास को हुआ है और उसका खाता तक नहीं खुला है।
कैंट रेलवे स्टेशन के सामने स्थित पैट्रोल पंप के पीछे प्रेम प्रकाश गुप्ता की चाय की दुकान है। यहां पर प्रेम प्रकाश अपने परिवार के साथ चाय बेचता है और काशी विद्यापीठ का भी छात्र है। वर्तमान समय मे प्रेम प्रकाश गुप्ता उर्फ अंकित एलएलबी प्रथम वर्ष का छात्र है। प्रेम प्रकाश को समाजवादी छात्रसभा ने अपना प्रत्याशी बनाया था और अंकित ने चुनाव में जमकर मेहनत कर उपाध्यक्ष पद का चुनाव जीता। अंकित के चुनाव जीतने के बाद परिसर में फिर से चाय की चर्चा होने लगी। अंकित ने यह दिखा दिया है कि मंजिल पाने के लिए मेहनत की जाये तो सफलता अवश्य मिलती है।


काशी विद्यापीठ छात्रसंघ के इतिहास में दर्ज हुआ अनूप सोनकर का नाम
काशी विद्यापीठ छात्रसंघ के इतिहास में अनूप सोनकर का नाम सोमवार को इतिहास में दर्ज हो चुका है। पिछले दो साल से छात्रसंघ चुनाव में नया इतिहास बनता जा रहा है। पिछले साल आयुषी श्रीमाली ने अध्यक्ष पद पर चुनाव जीता था और वह इस पद पर पहुंचने वाली पहली छात्रा है। अनूप सोनकर अनुसूचित जाति संवर्ग के है और इसके पहले इस संवर्ग के किसी प्रत्याशी ने अध्यक्ष पद पर चुनाव नहीं जीता था। अनूप सोनकर की जीत ने साबित कर दिया है कि काशी विद्यापीठ में सबको प्रतिनिधित्व करने का मौका मिल रहा है।


युवाओं को पसंद नहीं आयी राहुल गांधी की खाट
कांग्रेस को यूपी जीताने के लिए राहुल गांधी इन दिनों खाट पर चर्चा कार्यक्रम में व्यस्त है और प्रदेश के कई जिलों की यात्रा में जुटे हुए है। राहुल गांधी की इस यात्रा से पार्टी को कितना फायदा होगा यह समय की बात है लेकिन कांग्रेस की यूथ विंग राष्ट्रीय छात्र संगठन (राछास) को काशी विद्यापीठ छात्रसंघ चुनाव में जोर का झटका लगा है। युवाओं को राहुल गांध की खाट पसंद नहीं आयी है और उन्होंने राछास के किसी प्रत्याशी को नहीं जिताया है जिसके चलते राछास का खात नहीं खुल पाया है।
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