भाजपा के सहयोगी दल में टूट की आशंका।
वाराणसी. एक तरफ जहां पूरी बीजेपी इस वक्त राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में व्यस्त है। वहीं बीजेपी के एक सांसद ने नेतृत्व की पेशानी पर बल ला दिया है। जिस तरह से वह लगातार यूपी में विरोधी दलों के साथ मंच साझा कर रहे हैं और बीजेपी नेतृत्व के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साध रहे हैं उससे बीजेपी नेतृत्व की मुश्किलें बढती नजर आ रही है। यही नहीं आलम यह है कि इस कद्धावर बीजेपी सांसद के चलते बीजेपी के एक सहयोग दल में टूटन की आशंका भी बढ़ती जा रही है।
बता दें कि बीजेपी सांसद, पूर्व मंत्री और सिने स्टार 'बिहारी बाबू' के तल्ख तेवर बीजेपी नेतृत्व को काफी दिनों से परेशान किए है। लेकिन वह हैं कि बिना किसी लाग लपेट के बीजेपी नेतृत्व और खास तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाने पर लिए हैं। वह लगातार यह कह रहे हैं कि 2014 के चुनाव से पहले बीजेपी ने जनता से जो वादे किए थे वो अब तक पूरे नहीं हुए। बीजेपी सांसद पीएम मोद के नोटबंदी और जीएसटी पर लिए गए फैसला की भी पुरजोर मुखालफत कर रहे हैं।
बिहारी बाबू की यूपी में अपना दल (कृष्णा पटेल) और आम आदमी पार्टी से नजदीकियों के बड़े सियासी मायने निकाले जाने लगे हैं। जिस तरह से उन्होंने दो दिन पहले ही चित्रकूट में अपना दल के सम्मेलन में बीजेपी सरकार पर निशाना साधा, फिर प्रयागराज (इलाहाबाद) पहुंच कर मीडिया के सामने बीजेपी सरकार और पीएम नरेंद्र मोदी पर सवाल दागे उससे बीजेपी नेतृत्व में अंदरखाने बौखलाहट है। हालांकि बीजेपी नेतृत्व अरसे से अपने इस बागी सांसद के तेवर से परेशान है, लेकिन हालात इतने बदतर हैं कि न निगलते बन रहा है न उगलते बन रहा है। उधर बागी सांसद शत्रुघ्न सिन्हा हैं कि वह लगातार नेतृत्व को चुनौती दे रहे हैं। वह कहते हैं कि अगर सच कहना बगावत है तो हूं मैं बागी।
वैसे अपना दल और आम आदमी पार्टी से उनकी नजदीकियों ने सियासी गलियारों में चर्चा गर्म कर दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जिस तरह से वह वाराणसी की बेनिया बाग की आम आदमी पार्टी की रैली में शरीक हुए, उस वक्त अपना दल की प्रदेश अध्यक्ष पल्लवी पटेल भी मौजूद रहीं और उन्होंने कहा भी था कि बीजेपी के खिलाफ लड़ने वाले गठबंधन को उनका समर्थन जारी रहेगा। अब तो उन्होंने अपने ही सम्मेलन में शुत्रुघ्न सिन्हा को बुला कर उस बात को पुख्ता कर दिया।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि शत्रुघ्न सिन्हा का अपना दल के निकट आने का असर अपना दल (अनुप्रिया पटेल गुट) पर भी पड़ सकता है। अनुप्रिया के साथ होते हुए भी जो कुछ नेता खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं वो देर सबेर कृष्णा पटेल गुट से जुड़ सकते हैं। ऐसा होने पर बीजेपी को दोहरा नुकसान उठाना पड़ सकता है। वजह साफ है, पूर्वांचल के पटेल वोटों के ध्रवीकरण के लिए ही बीजेपी ने अपना दल से गठजोड़ किया था लेकिन कुछ ही दिनों के बाद सोनेलाल पटेल परिवार में ही दरार पड़ गई और कृष्णा पटेल बडी बेटी अनुप्रिया को छोड़ कर अलग हो गईं। हाल के दिनों में अपना दल और आम आदमी पार्टी के बीच हुए चुनावी गठजोड़ ने भाजपा के साथ अनुप्रिया गुट के लिए मुसीबतें बढ़ा दी हैं।
इस पर तुर्रा ये कि शत्रुघ्न सिन्हा ने जिस तरह से गुरुवार को प्रयागराज में यहां तक कह दिया है कि लोकसभा चुनाव में वह बार-बार आम आदमी पार्टी और अपना दल के लिए प्रचार करने आएंगे। यानी यह साफ हो गया है कि बिहारी बाबू का साथ यूपी में लोकसभा चुनाव में कोई बड़ा गुल खिलाएगा जो बीजेपी पर भारी पड़ सकता है। शत्रुघ्न के भाजपा विरोधी गुटों से मेलजोल से कायस्थ वोटों का समीकरण भी गड़बड़ा सकता है।