सपा मध्य प्रदेश में सभी 230 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। छत्तीसगढ़ और झारखण्ड में भी विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में।
वाराणसी. सपा सुप्रीमों अखिलेश यादव के रुख से गठबंधन के साथी दलों की बेचैनी बढ़ गई है। खास तौर पर जिस तरह से अखिलेश ने साल के अंत में होने वाले मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में सभी 230 सीटों पर लड़ने की तैयारी शुरू कर दी है। साथ ही वह छत्तीसगढ़ और झारखंड विधानसभा चुनाव भी लड़ने के पूरे मूड में हैं। इतना ही नहीं उन्होंने साफ किया है कि बीएसपी के साथ सीटों के तालमेल पर अभी कोई बात नहीं हुई है। यानी कांग्रेस ही नहीं बसपा के साथ भी उनके रिश्तों को लेकर फिलहाल पिक्चर साफ नहीं हो पा रही है। सभी विपक्षी दल उनके इस रुख से चकित हैं।
एक तरफ जहां बीजेपी को आगामी लोकसभा चुनाव मे पटखनी देने के लिए सभी विपक्षी दलों का महागठबंधन बनने की बात की जा रही है, इसी दरम्यान अखिलेश का ये रुख जिसके तहत उन्होंने फिलहाल मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए तकरीबन डेढ़ सौ पर्यवेक्षकों को उतार दिया है। पर्यवेक्षकों से वह लगातार इनपुट ले रहे हैं। मध्य प्रदेश में अपनी जड़ें जमानी शुरू कर दी है। पर्यवेक्षकों के इनपुट के आधार पर जिला स्तर से लेकर ब्लाक और बूथ स्तर तक पार्टी को मजबूत करने की दिशा में काम शुरू हो गया है। पर्यवेक्षकों से मिले इनपुट के आधार पर ही उन्होंने स्पष्ट किया है कि वह वहां की सभी 320 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। पूर्व सीएम अखिलेश का यह दांव कांग्रेस के लिए कहीं ज्यादा घातक साबित हो सकता है जो वहां अपनी खोई जमीन वापस पाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाए है।
हालांकि कर्नाटक विधानसभा चुनाव के बाद जिस तरह से कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी की नजदीकियां बढ़ी हैं। जिस तरह से कुमार स्वामी की ताजपोशी के वक्त बसपा सुप्रीमों मायावती और कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी की निकटता दिखी उसे बड़े सियासी दांव के रुप में देखा गया। कांग्रेस सूत्र बताते हैं कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस और बसपा एक साथ चुनाव लड़ सकते हैं। इसकी बिसात बिछने लगी है। यानी मध्य प्रदेश में कांग्रेस बसपा गठबंध बनता दिख रहा है लेकिन सपा अगर वास्तव में अलग चुनाव लड़ती है तो मतों का विभाजन तय है जिसका लाभ निःसंदेह बीजेपी को ही मिलेगा।
वहीं यूपी में फूलपुर और गोरखपुर विधानसभा चुनाव में बसपा का समर्थन हासिल कर दोनों सीट पर कब्जा करने वाली सपा के मुखिया का यह कहना कि समाजवादी पार्टी आगामी लोकसभा चुनाव के लिए सपा और बसपा के बीच सीटों के बंटवारे पर फिलहाल कोई बात नहीं हुई है और इस बारे में उचित समय पर विचार-विमर्श किया जाएगा। यहां यह माना जा रहा है कि बसपा ने लोकसभा चुनाव के लिए यूपी की 80 लोकसभा में से 40 सीटें अपने लिए मांग लिया है। इस पर फिलहाल अखिलेश और उनकी पार्टी तैयार नहीं हो पा रही है। तभी तो उन्होंने कह दिया है कि सीटों के बंटवारे पर हमारे बीच अभी कोई बात नहीं हुई है। ऐसे में आगामी लोकसभा चुनाव में विपक्षी दलों के बीच सीटों के बंटवारे को पेचीदा मसले के तौर पर देखा जा रहा है। इस बीच सपा अगले लोकसभा चुनाव के लिये तैयारियां कर रही है और वह सम्भावित प्रत्याशियों के चयन की प्रक्रिया शुरू कर चुकी है। अखिलेश की रणनीति का ही परिणाम है कि बनारस के पदाधिकारियों ने अपनी मासिक बैठक में लोकसभा चुनाव के मद्देनजर विधानसभावार जिम्मेदारियां तय कर दीं। सबको उनके काम समझा दिए गए हैं।