वाराणसी। गलियों में बसे बनारस के पक्के मोहाल में डॉ अभिनव श्रीवास्तव की आँखें अब भी अपने दोस्त गौतम गोस्वामी को याद कर छलक पड़ती है। कंपकंपाते होठों से वो कहते हैं अनुराधा का हाल ठीक नहीं होगा बहुत जल्दी उस पर इतनी सारी जिम्मेदारी आ गई। मूल रूप से डेहरी आनसोन बिहार के रहने वाले और काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से मेडिसिन में स्नातक फिर परास्नातक गौतम गोस्वामी ने जब सिविल सर्विसेज में जाने का फैसला किया तो सभी जानते थे कि चिकित्सा विज्ञान की कक्षाओं में हमेशा टॉप रहने वाला गौतम वहां भी बाजी मारेगा। हुआ यही, 1991 की सिविल सेवा परीक्षाओं में गौतम गोस्वामी ने सातवाँ स्थान प्राप्त किया ,उस रात बीएचयू कैम्पस में शानदार जश्न मना था। उस दिन लेकिन किसी को नहीं पता था कि जल्द ही कैम्पस का यह हीरा मगध के आसमान पर तारा बनकर चमकेगा ,तारा चमका लेकिन सियासत ने ऐसा कलंक का टीका लगाया कि गौतम पहले जेल पहुँच गए और फिर कैंसर ने उन्हें मार डाला। अपनी युवावस्था के आठ साल बनारस में बिताने वाले गौतम गोस्वामी की चर्चाएँ लालू प्रसाद यादव के अलग अलग ठिकानों पर पड़ी छापेमारी के बाद फिर से शुरू हो गई है।