शराब में जहर मिलाकर पिला दिया था दोस्तों ने

वकील पुत्र की हत्या में पुलिस की लापरवाही से क्षुब्ध अधिवक्ता मिले एसएसपी से, विवेचक बदलने की मांग
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Jan 28, 2016
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वाराणसी. प्रापर्टी के विवाद में बीते वर्ष अक्टूबर को शराब में जहर मिलाकर अधिवक्ता पुत्र नीरज मिश्र की हत्या के मामले में लोकल पुलिस की भूमिका से नाराज अधिवक्ताओं का प्रतिनिधिमंडंल गुरुवार को एसएसपी आकाश कुलहरि से मिलने पहुंचा। भेलूपुर इंस्पेक्टर की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए बताया कि पहले तो वारदात को लेकर उन्होंने एफआईआर नहीं लिखी। एसएसपी के ही हस्तक्षेप पर मुकदमा दर्ज हुआ। पीएम रिपोर्ट में मौत की वजह स्पष्ट न होने पर उन्होंने उसे विसरा जांच के लिए नहीं भेजा। हीलाहवाली के बाद एक माह बीतने पर विसरा जांच को भेजा। रिपोर्ट में यह बात स्पष्ट हो गई कि नीरज को शराब में जहर मिलाकर पिलाया गया था। नामजद एफआईआर के बाद भी किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई। अधिवक्ताओं का आरोप था कि इंस्पेक्टर ने घटनास्थल पर भी जाना उचित नहीं समझा, वहां मौजूद सीसी फुटेज को नहीं देखा, आरोपियों के मोबाइल की कॉल्स डिटेल को नहीं खंगाला। ऐसे में इंस्पेक्टर की नीयत पर शक है। प्रतिनिधिमंडल ने नीरज की मौत की विवेचना किसी अन्य इंस्पेक्टर से कराने की मांग की। एसएसपी ने अधिवक्ताओं को भरोसा दिलाया कि मामले की निगरानी वह स्वयं करेंगे। प्रतिनिधिमंडल में विजयशंकर तिवारी, श्रीनाथ त्रिपाठी, अरुण त्रिपाठीए माइकल समेत अन्य अधिवक्ता मौजूद रहे।
जमीन विवाद में हुई थी हत्या
अधिवक्ता इंद्रदेव मिश्र के पुत्र नीरज प्रापर्टी का कारोबार करते थे। पड़ोस के पप्पू के साथ उनकी मित्रता थी जो बीच में किसी बात को लेकर टूट गई। घटना से कुछ दिनों पूर्व पप्पू दोबारा नीरज के साथ काम करने लगा। उसी के कहने पर 17 अक्टूबर 2015 को नीरज सारनाथ स्थित एक बसपा नेता के लॉन में आयोजित पार्टी में पहुंचा था। आरोप है कि इस दौरान पूनम तिवारी, प्रमोद तिवारी, नारायण दत्त तिवारी व अन्य ने नीरज को शराब पिलाई जिसमें उन लोगों ने पहले से जहर मिला रखा था। परिजनों का आरोप है कि पूनम नेे नीरज का तीस लाख रुपये गबन कर लिया था। इसको लेकर कई बार पंचायत भी हुई थी। आशंका है कि इन्हीं रुपयों की खातिर आरोपियों ने साजिश रच नीरज को मार डाला।
Published on:
28 Jan 2016 03:04 pm
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