वाराणसी

युवाओं में बढ़ रहा गठिया रोग का खतरा, आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज से आए चौकाने वाले आंकड़े

वाराणसी के राजकीय आयुर्वैदिक मेडिकल कॉलेज से चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। मेडिकल कॉलेज की माने तो अब युवाओं में गठिया रोग का खतरा बढ़ रहा है। इसके पीछे का कारण लोगों का बदलता लाइफस्टाइल है....

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Mar 06, 2026
Arthritis and joint pain

वाराणसी: युवाओं में गठिया रोग का खतरा बढ़ रहा है। इसको लेकर वाराणसी के राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय एवं चिकित्सालय से चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। अस्पताल की मानें तो प्रतिदिन 80 में से 30 मरीज ऐसे हैं जो युवा है और उन्हें गठिया रोग से ग्रसित हैं। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि इसके पीछे का कारण लोगों की बदलती जीवनशैली है।

क्या बोले नोडल अधिकारी

मेडिकल कॉलेज में स्थापित गठिया उपचार एवं उन्नत शोध केंद्र के नोडल अधिकारी मनीष मिश्रा ने बताया कि अक्सर बुजुर्गों को होने वाला गठिया रोग अब युवाओं को भी चपेट में लेने लगा है। उन्होंने बताया कि प्रतिदिन हमारे सेंटर पर करीब 80 मरीज आते हैं, इनमें से 30 मरीज ऐसे होते हैं जिनकी आयु 30 से 32 साल के बीच की होती है। यह चौंकाने वाले आंकड़े हैं कि युवाओं में गठिया रोग उत्पन्न होना शुरू हो गया है।

उन्होंने बताया कि आयुष विधा से चलने वाला हमारा सेंटर पूर्वांचल का एकमात्र केंद्र है और यहां पूर्वांचल ही नहीं बल्कि बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड से भी लोग अपना इलाज करवाने पहुंचते हैं। उन्होंने बताया कि गठिया रोग का ट्रेंड पूरी तरह से बदल गया है। अक्सर यह बीमारी वृद्धावस्था में होती थी, लेकिन अब धीरे-धीरे युवाओं तक फैलने लगी है।

पुरुषों के मुकाबले महिलाएं ज्यादा प्रभावित

मिश्रा के मुताबिक पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में यह ज्यादा बढ़ रहा है और इसका एकमात्र कारण बदलता लाइफस्टाइल है। उन्होंने बताया कि युवा जंक फूड की तरफ ज्यादा आकर्षित होते हैं। ऐसे में उन्हें जरूरी कैल्शियम और मिनरल्स नहीं मिल पाते हैं। इसके साथ ही मोटापा भी बढ़ता है, जिसके कारण गठिया रोग की चपेट में युवा आ रहे हैं।

अस्पताल के कर्मी लोगों को करते हैं जागरूक

उन्होंने बताया कि केंद्र पर आने वाले लोगों को यहां के स्टाफ जागरुक करते हैं। उनके जीवनशैली में बदलाव लाने के नए-नए तरीके सिखाए जाते हैं। इसके साथ ही योग के माध्यम से बीमारी को दूर रखने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने बताया कि प्रत्येक 10 दिन पर एक ग्रुप बनाया जाता है और मरीज को योग भी कराया जाता है। अस्पताल के कर्मचारी मरीज के डाइट पैटर्न में भी बदलाव करते हैं।

Published on:
06 Mar 2026 01:38 pm
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