
वाराणसी. सिगरा थाना क्षेत्र के विद्या विहार कालोनी में ११ अक्टूबर की रात में गिट्टी-बालू के ठेकेदार विशाल सिंह (३५) की हत्या की जांच में पुलिस जुट गयी है। पुलिस के लिए हत्यारों को पकडऩा बहुत बड़ी चुनौती है। एसटीफ, क्राइम ब्रांच व स्थानीय पुलिस ने हत्यारों का सुराग पता करने के लिए हाथ-पांव मार रही है। ठेकेदार की जिस तरह से ताबड़तोड़ ढंग से गोली चला कर हत्या की गयी है वह किसी पेशेवर अपराधी का ही काम हो सकता है। गुरुवार को व्यपारियों ने दुकान बंद की और प्रदर्शन करके हत्यारों को गिरफ्तार करने की मांग की है। दुकानदारों ने दो मिनट का मौन रख कर मृतक की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना भी की।
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ठेकेदार विशाल सिंह बहुत कम समय में ही तरक्की कर चुका था। पुलिस सूत्रों की माने तो इस दौरान उसके कई अपराधियों से सम्पर्क हो गया था। बिना किसी उपर हा साथ लिया ठेके की दुनिया में बढऩा संभव नहीं है और विशाल सिंह ने भी यही राह अपनायी थी। ठेकेदार का नाम बढ़ता गया तो पैसा भी आने लगा। ठेकों को लेकर अपनों से मनमुटाव भी होने लगा। पुलिस सूत्रों की माने तो पूर्व में पांच लाख रुपये इनामी रहे डॉन के एक खास व्यक्ति पर टकटकपुर में गोली चली थी उसमे भी विशाल का नाम आया था। विशाल पर हत्या का एक मुकदमा दर्ज था और वह जेल भी गया था। यूपी का सबसे बड़ा सुपारी किलर माने जाने वाले माफिया की पत्नी के भाई लखनऊ में हत्या कर दी गयी थी और हत्या में मुखबिरी करने में भी विशाल सिंह का नाम आया था। पुलिस की परेशानी यह है कि किस गिरोह या व्यक्ति ने मौका पाकर दुश्मनी साध ली है इसका खुलासा करना आसान नहीं है।
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हत्या करने आया बदमाशा दोनों हाथ से चला रहा था गोली
विशाल सिंह ११ अक्टूबर की रात में अपने भोजनालय से निकल कर घर पहुंचे थे कि पीछे से आये बाइक सवार ने ताबड़तोड़ गोली चला कर उसकी हत्या कर दी थी। प्रत्यशदर्शियों ने पुलिस को बताया था कि गोली चलाने वाला दोनों हाथ से ताबड़तोड़ फायरिंग कर रहा था। बदमाशों के पास अत्याधुनिक असलहे थे और जिस तरह से गोली मारने के बाद बदमाशों ने घायल विशाल के पास जाकर देखा था उसके बाद ही वह भागे थे। यह आम बदमाशों को काम नहीं हो सकता है ऐसा कार्य पेशेवर गैंग या फिर पेशेवर अपराधी कर सकता है।
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पिता ने कहा कि बेटे की किसी के साथ नहीं थी अदावत
मृत ठेकेदार विशाल सिंह के पिता दलश्रृंगार सिंह का कहना था कि उनका उनके बेटे ने गुवाहाटी टेक्सटाइल में इंजीनियरिंग किया था और कुछ साल प्राइवेट सेक्टर में काम भी किया था। इसके बाद बिहार के दोस्तों के सम्पर्क में आकर ठेकेदारी करने लगा थ। पिता का कहना है कि विशाल किसी तरह का नशा नहीं करता था और प्रतिदिन सुबह डेढ़ घंटे तक कसरत करता था अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखता था। पिता का कहना है कि ठेकेकारी करने वाले इसके अन्य सहयोगी नशा करते थे और ठेकों का हिसाब भी नहीं देते थे, जिसके चलते विशाल ने अपना ठेका लेना शुरू कर दिया था। ठेकेदारी के हिसाब के प्रश्र पर कहा कि विशाल ने सहयोगियों से कहा था कि वह आकर हिसाब दे जाये। यदि उनका पैसा निकलता है तो ले जाये, नहीं तो दे जाये। विशाल के सहयोगी आज तक हिसाब देने नहीं आये हैं। विशाल की शादी सपा में कैबिनेट मंत्री रहे गाजीपुर निवासी नेता के परिवार में हुई थी।
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